गुलमर्ग के फेमस गोंडोला में 500 फीट ऊंचाई पर फंस गए 300 लोग, 7 घंटे तक चला रेस्क्यू और अटकी रहीं सांसें

अपडेटेड May 25, 2026 पर 9:42 PM
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जम्मू-कश्मीर के मशहूर हिल स्टेशन गुलमर्ग से एक बेहद हैरान और डरा देने वाली खबर सामने आई है।

जम्मू-कश्मीर के मशहूर हिल स्टेशन गुलमर्ग से एक बेहद हैरान और डरा देने वाली खबर सामने आई है। एशिया के सबसे ऊंचे रोपवे गुलमर्ग गोंडोला में सोमवार दोपहर को अचानक आई एक तकनीकी खराबी की वजह से करीब 300 पर्यटक हवा में फंस गए। ये सभी लोग जमीन से लगभग 500 फीट की ऊंचाई पर लटकी 65 केबिनों में फंसे हुए थे। इस घटना के बाद तुरंत सेना और आपदा प्रबंधन टीमों की मदद से एक बेहद मुश्किल और बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब 7 घंटे तक चली इस कड़ी मशक्कत के बाद सभी 300 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार दोपहर करीब 12 बजे गुलमर्ग गोंडोला के सिस्टम में अचानक खराबी आ गई। इसके तुरंत बाद कई बड़ी एजेंसियों को मिलाकर एक बड़ा मल्टी-एजेंसी रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि कुछ केबिन जमीन से लगभग 500 फीट की ऊंचाई पर हवा में थे। इसकी वजह से वहां से लोगों को निकालना बहुत चुनौतीपूर्ण था और इसमें काफी समय लगा। इसके अलावा इलाके में हो रही भारी बारिश ने भी रेस्क्यू मिशन में मुश्किलें खड़ी कीं।

इस मामले की जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि अब रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी तरह समाप्त हो चुका है और हवा में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इस मालफंक्शन के बाद अधिकारियों ने गुलमर्ग केबल कार सर्विस (गोंडोला) के दोनों फेज के ऑपरेशन्स को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है। केबल कार सिस्टम को ठीक करने के लिए रीस्टोरेशन वर्क चल रहा है


लगाए गए रस्से और सीढ़ियां, इन टीमों ने संभाला मोर्चा

गुलमर्ग के इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस और सेना के साथ-साथ स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) के जवानों को लगाया गया था। सेना की चिनार कॉर्प्स की मदद से ते और कॉर्डिनेटेड रेस्क्यू हुआ। ग्राउंड पर मौजूद ट्रेंड टीमों ने पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए रस्सियों और सीढ़ियों का इस्तेमाल किया।

सीएम उमर अब्दुल्ला और एलजी मनोज सिन्हा ने खुद की मॉनिटरिंग

इस गंभीर घटना पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन की पूरी नजर बनी हुई थी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि सरकार स्थिति की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रही है। उन्होंने लिखा कि सभी केबिन सुरक्षित हैं और फंसे हुए पर्यटकों को निकालने के लिए जमीन पर मौजूद एक्सपर्ट टीमों द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और घबराने की कोई बात नहीं है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने भी एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वे केबल कार केबिनों में फंसे पर्यटकों के रेस्क्यू ऑपरेशन की खुद निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए डीजीपी नलिन प्रभात को खुद घटनास्थल पर जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डीसी और एसएसपी के साथ पुलिस, सेना और एसडीआरएफ की संयुक्त टीमें सभी पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी हुई हैं।

गुलमर्ग में केबल कार का बंद होना या खराब होना पहली बार नहीं हुआ है, इसके पहले भी कुछ हादसे और तकनीकी दिक्कतें सामने आ चुकी हैं। इससे पहले 25 जून 2017 को गुलमर्ग गोंडोला में एक बड़ा हादसा हुआ था। तब तेज हवाओं की वजह से एक पेड़ उखड़कर केबिन से टकरा गया था। उस हादसे में केबिन जमीन पर गिर गया था और 7 लोगों की मौत हो गई थी। पिछले साल जनवरी के महीने में भी तकनीकी दिक्कतों के कारण इस केबल कार सर्विस को कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से सस्पेंड किया गया था।

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