Get App

Haridwar Stampede: 'दुकानदारों ने हमपर लाठियां चलाईं...', मनसा देवी हादसे की भयानक सच्चाई आई सामने!

Mansa Devi Stampede: घटना में जान गंवाने वाले ज़्यादातर श्रद्धालु उत्तर प्रदेश और बिहार से आए थे, जो कांवड़ यात्रा के दौरान मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे थे। भगदड़ कैसे शुरू हुई, इसको लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि बिजली का करंट फैलने की अफवाह फैली, जिससे लोग डरकर भागने लगे। वहीं, कुछ चश्मदीदों ने हैरान करने वाला खुलासा किया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 28, 2025 पर 8:23 PM
Haridwar Stampede: 'दुकानदारों ने हमपर लाठियां  चलाईं...', मनसा देवी हादसे की भयानक सच्चाई आई सामने!
भगदड़ मच गई जब किसी ने करंट फैलने की अफवाह फैला दी।

Mansa Devi Stampede: हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में बीते रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया। मनसा देवी मंदिर में बीते रविवार को भगदड़ मच गई और इस हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। बता दें कि मनसा देवी मंदिर मार्ग पर उस समय भगदड़ मच गई जब किसी ने करंट फैलने की अफवाह फैला दी। इससे अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे।  घटना को लेकर श्रद्धालुओं के मन में पीड़ा बहुत है। वहीं अब हादसे को लेकर वहां मौजूद लोगों के आंखों देखा हाल बताया है।

श्रद्धालुओं ने बताया आंखों देखा हाल

बरेली से आए एक श्रद्धालु विकास ने बताया कि जैसे ही मंदिर के कपाट बंद हुए, वहां हालात बिगड़ने लगे। उन्होंने कहा, "लोग कह रहे थे कि दर्शन खत्म हो गए हैं और वापस लौट रहे थे। तभी किसी ने चिल्लाकर कहा कि बिजली का करंट लग गया है। इससे लोग घबरा गए और इधर-उधर भागने लगे।"भीड़ मंदिर की ओर और वहां से लौट रही थी, जिससे बाजार के पास एक संकरे रास्ते में बहुत ज़्यादा लोग जमा हो गए। वहीं अपने परिवार के साथ दर्शन करने आई अनीता कुमारी ने बताया, "भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि हिलने की भी जगह नहीं थी। लोग चिल्ला रहे थे कि मंदिर बंद हो गया है। डर के माहौल में लोग तेजी से पीछे की ओर भागने लगे और एक-दूसरे को धक्का देने लगे। तभी भगदड़ मच गई।"

लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे

 दर्शन के लिए आई अनीता ने बताया कि इस भगदड़ में उसने अपने 13 साल के भतीजे को खो दिया। उसकी 5 साल की भतीजी बच तो गई, लेकिन उसे गंभीर चोटें आई हैं। आँसू रोकते हुए अनीता ने कहा, "अगर वहाँ पुलिस होती, तो ये हादसा नहीं होता। भीड़ को संभालने वाला कोई नहीं था, न कोई बैरिकेडिंग थी, कुछ भी नहीं।"

एक और महिला, निर्मला ने अपने बच्चों को बचाने के लिए खुद को उनके ऊपर ढक दिया। लेकिन फिर भी उसका 13 साल का बेटा नहीं बच सका। उसकी छोटी बेटी के पैर में गंभीर चोट आई है और उसे 14 टांके लगे हैं। निर्मला ने बताया, "मैंने लोगों को चिल्लाते सुना – 'मंदिर बंद है, वापस जाओ!' लेकिन बाहर निकलने का रास्ता ही बंद था। लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे, कोई रास्ता नहीं था निकलने का।"

सब समाचार

+ और भी पढ़ें