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Hathras Victim Family Relocation: हाथरस पीड़िता के परिवार को 3 महीने में नोएडा या गाजियाबाद करें शिफ्ट; हाईकोर्ट का UP सरकार को निर्देश

Hathras Victim Family Relocation: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ (जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह) ने हाथरस पीड़िता के परिवार के पुनर्वास और स्थानांतरण (Relocation) में हो रही देरी पर उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त की है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Aug 26, 2026 पर 11:29 AM
Hathras Victim Family Relocation: हाथरस पीड़िता के परिवार को 3 महीने में नोएडा या गाजियाबाद करें शिफ्ट; हाईकोर्ट का UP सरकार को निर्देश
Hathras Victim Family Relocation: हाथरस दुष्कर्म पीड़िता के परिवार के पुनर्वास को लेकर सरकार के रवैये पर अदालत नाराज है

Hathras Victim Family Relocation: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाथरस दुष्कर्म मामले की पीड़िता के परिवार के पुनर्वास को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकार के 22 फरवरी, 2025 के फैसले को रद्द करते हुए उसे तीन महीने के भीतर पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में बसाने का निर्देश दिया। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट ने पहले राज्य सरकार को पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में बसाने के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया था। लेकिन सरकार ने इस अनुरोध पर समुचित ध्यान नहीं दिया।

पीठ ने कहा कि सरकार ने अदालत के निर्देशों की अनदेखी करते हुए अपने फैसले में परिवार को पुनर्वास के लिए कासगंज, एटा और अलीगढ़ में से किसी एक स्थान को चुनने का विकल्प दिया था। सोमवार को दिए गए आदेश में पीठ ने कहा कि 22 फरवरी, 2025 के फैसले में सरकार ने गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वास के परिवार के अनुरोध का कोई उल्लेख नहीं किया था। इसलिए इसे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया फैसला नहीं माना जा सकता।

NCR में बसाने की मांग

पीठ ने कहा कि इस मामले में राज्य की ओर से अनावश्यक विरोध दिखाई देता है। उसके रवैये से परिवार के इस आरोप को बल मिलता है कि सरकार इस मामले को अपने खिलाफ मुकदमे की तरह देख रही है। पीड़िता के परिवार की ओर से पेश वकील महमूद प्राचा ने कहा कि कासगंज, एटा और अलीगढ़ हाथरस के करीब हैं। इससे परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में परिवार का कोई रिश्तेदार भी नहीं रहता है।

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