हवाई यात्रियों को बड़ा झटका! आसमान छूते तेल के दाम ने रोकी रफ्तार, IndiGo-Air India ने उड़ानों में की बड़ी कटौती का ऐलान

IndiGo Air India Flight Cut: आंकड़ों के अनुसार, मार्च और अप्रैल के महीनों में ही देश की चार सबसे बड़ी एयरलाइंस के ऑपरेशन्स में पिछले साल के मुकाबले करीब 6% की गिरावट देखी गई है। इस दौरान मार्केट लीडर इंडिगो ने 4.5% और एयर इंडिया ने 7.5% की कमी की थी। एयर इंडिया की बजट आर्म 'एयर इंडिया एक्सप्रेस' में सबसे बड़ी 17.1% की गिरावट दर्ज की गई थी

अपडेटेड May 27, 2026 पर 5:38 PM
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आने वाले दिनों में न सिर्फ कई रूटों पर फ्लाइट्स के विकल्प कम होंगे, बल्कि हवाई टिकटें भी काफी महंगी हो सकती हैं

ATF Fuel Price Impact on Airlines: अगर आप जून से अगस्त 2026 के बीच कहीं फ्लाइट से यात्रा करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको बड़ा झटका लग सकता है। देश की दो सबसे बड़ी एयरलाइंस, इंडिगो और एयर इंडिया, घरेलू रूटों पर अपनी उड़ानों में भारी कटौती करने जा रही हैं।

विमान ईंधन यानी एटीएफ की आसमान छूती कीमतों के चलते एयरलाइंस ने यह बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। इससे आने वाले दिनों में न सिर्फ कई रूटों पर फ्लाइट्स के विकल्प कम होंगे, बल्कि हवाई टिकटें भी काफी महंगी हो सकती हैं।

इंडिगो और एयर इंडिया की बड़ी कटौती


एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनियों ने अगले तीन महीनों के लिए अपनी उड़ानों में बड़ी कटौती का ऐलान किया है:

IndiGo की कटौती: इंडिगो जून से अगस्त के बीच अपनी घरेलू उड़ानों में 5 से 7 प्रतिशत की कटौती करने की योजना बना रही है। इससे पहले एयरलाइन ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी 17 प्रतिशत की बड़ी कमी की है।

Air India का बड़ा कदम: एयर इंडिया इस दौरान घरेलू रूटों पर अपनी उड़ानों में 22 प्रतिशत तक की कटौती करने जा रही है। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, ईंधन की लगातार ऊंची कीमतों के चलते चुनिंदा डोमेस्टिक रूट्स पर उड़ानों के फेरे अस्थाई रूप से कम किए जा रहे हैं। एयर इंडिया ने भी इससे पहले चुनिंदा इंटरनेशनल फ्लाइट्स में कटौती की थी।

क्यों उड़ानें कम करने पर मजबूर हुईं एयरलाइंस?

कंपनियों के इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:

ATF की कीमतों में भयंकर उछाल: विमान ईंधन (ATF) किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च का लगभग एक-चौथाई यानी 25% हिस्सा होता है। ईंधन महंगा होने का सीधा असर एयरलाइंस के खर्च पर पड़ा है।

सीजनल डिमांड में कमी: गर्मियों में स्कूलों की छुट्टियां खत्म होने के बाद हवाई यात्रियों की संख्या में आम तौर पर थोड़ी कमी आती है। इस बार इस कम डिमांड के साथ-साथ फ्यूल के बोझ ने एयरलाइंस पर दबाव दोगुना कर दिया है।

मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल का खेल

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के चलते पिछले करीब तीन महीनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी हैं।

भारतीय विमानन कंपनियां इस संकट के प्रति बेहद संवेदनशील हैं क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से इंपोर्ट करता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने भी एयरलाइंस की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है।

लगातार घट रही हैं उड़ानें

एविएशन एनालिटिक्स फर्म 'सिरियम' के आंकड़े बताते हैं कि मार्च और अप्रैल के महीनों में ही देश की चार सबसे बड़ी एयरलाइंस के ऑपरेशन्स में पिछले साल के मुकाबले करीब 6% की गिरावट देखी गई थी। इस दौरान मार्केट लीडर इंडिगो ने 4.5% और एयर इंडिया ने अपनी सेवाओं में 7.5% की कमी की थी। वहीं, एयर इंडिया की बजट आर्म 'एयर इंडिया एक्सप्रेस' में सबसे बड़ी 17.1% की गिरावट दर्ज की गई थी।

अब आगे क्या होगा?

एयर इंडिया के मुताबिक, वे बाजार की मांग और परिचालन स्थितियों पर लगातार नजर रख रहे हैं। जैसे ही ईंधन की कीमतें स्थिर होंगी, उड़ानों को फिर से सामान्य कर दिया जाएगा। लेकिन तब तक यात्रियों को कुछ रूट्स पर बढ़े हुए किराए और सीमित फ्लाइट्स का सामना करना पड़ सकता है।

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