Sainik Farm Legal Status: अरबपतियों का आशियाना, लग्जरी फार्म हाउस फिर भी अनअथॉराइज्ड! सैनिक फार्म के कानूनी पचड़े की इनसाइड स्टोरी
दिल्ली का सैनिक फार्म विशाल फार्महाउसों, लग्जरी बंगलों और देश के सबसे अमीर लोगों के आशियाने के तौर पर जाना जाता है। दक्षिण दिल्ली का यह पॉश इलाका दिखने में जितना भव्य है कानून की किताबों में इसकी पहचान उतनी ही अलग है।
अरबपतियों की ये कॉलोनी आज भी है अवैध! दिल्ली के Sainik Farm पर हाई कोर्ट सख्त
दिल्ली का सैनिक फार्म विशाल फार्महाउसों, लग्जरी बंगलों और देश के सबसे अमीर लोगों के आशियाने के तौर पर जाना जाता है। दक्षिण दिल्ली का यह पॉश इलाका दिखने में जितना भव्य है कानून की किताबों में इसकी पहचान उतनी ही अलग है। अरबपतियों की यह कॉलोनी आज भी आधिकारिक तौर पर एक अनअथॉराइज्ड यानी कि अनाधिकृत और अनरेगुलराइज्ड है।
हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक सैनिक फार्म की कानूनी स्थिति और निर्माण पर लगे प्रतिबंधों से जुड़े मामले पिछले एक दशक से अधिक समय से अदालतों में लंबित हैं। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस लंबे समय से लटके विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को एक साथ मिलकर इसका स्थायी समाधान निकालने का निर्देश दिया है।
दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख- आप इन्हें अधर में नहीं लटका सकते
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने अधिकारियों को दो महीने के भीतर एक जॉइंट बैठक करने और नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई में इसका ठोस नतीजा पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अधिकारियों को अब सैनिक फार्म के भविष्य को लेकर कोई योजना, नीतिगत फैसला या सैद्धांतिक निर्णय सामने रखना होगा।
हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'निर्माण अवैध है, वहां कोई लेआउट नहीं है, कोई बिल्डिंग प्लान स्वीकृत नहीं है। निवासी अपनी संपत्तियों में मरम्मत तक नहीं करा पा रहे हैं। आपको कोई न कोई फैसला तो लेना ही होगा। आप उन्हें इस तरह अधर में नहीं लटका सकते। आपकी ही सरकारें एक के बाद एक कानून लाकर अवैध कॉलोनियों को नियमित करती रही हैं। आप अनधिकृत निर्माण होने देते हैं, उसे पनपने देते हैं और फिर नियमित कर देते हैं। अब समय आ गया है कि सैनिक फार्म पर भी अंतिम फैसला लिया जाए ताकि लोगों को अपना भविष्य पता चल सके।'
वहीं, केंद्र सरकार के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि पहले जब भी निवासियों को मरम्मत की अनुमति दी गई उसकी आड़ में बड़े पैमाने पर नए कंस्ट्रक्शन किए गए और वहां 'महल' खड़े कर दिए गए।
सैनिक फार्म की कैसे हुई शुरुआत और ये कैसे बनी अरबपतियों की अनअथॉराइज्ड कॉलोनी?
सैनिक फार्म की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी। इसे मूल रूप से युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं और सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों के लिए एक कोऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में स्थापित किया गया था। समय के साथ इस इलाके का चरित्र बदलता चला गया। भूखंडों को बंटकर कर बेचा जाने लगा। छोटे फार्म और सीमित ढांचों की शुरुआती अवधारणा धीरे-धीरे बड़े बंगलों, आलीशान फार्महाउसों और लग्जरी घरों वाले हाई-प्रोफाइल इलाके में बदल गई। इसके लिए डीडीए से आवश्यक मंजूरियां भी नहीं ली गईं।
साल 2009 में तत्कालीन शहरी विकास राज्य मंत्री सौगत रॉय ने संसद में बताया था कि सैनिक फार्म पूरी तरह से एक अनाधिकृत कॉलोनी है और इसे निर्माण मानकों का उल्लंघन करके बनाया गया है। उस समय एमसीडी के सर्वेक्षण में इस इलाके में लगभग 1650 पते और इमारतें चिन्हित की गई थीं।
20 सालों से जारी है रेगुलराइजेशन की लड़ाई, फिर भी क्यों नहीं मिली मंजूरी?
सैनिक फार्म को वैध कराने की लड़ाई पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से चल रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2001 से ही इस इलाके में नए निर्माण पर रोक लगा रखी है। अगस्त 2025 में भी दिल्ली हाई कोर्ट ने सैनिक फार्म की स्थिति को लेकर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार की कड़ी आलोचना की थी। दिल्ली की अन्य अनअथॉराइज्ड कॉलोनियों को नियमित करने के लिए जो नीतियां बनाई गईं, उनसे सैनिक फार्म को हमेशा बाहर रखा गया।
वर्ष 2009 में सरकार ने स्पष्ट किया था कि सैनिक फार्म उन 1218 कॉलोनियों में शामिल नहीं था जिन्हें अनंतिम रूप से नियमित किया गया था। 2007 के संशोधित दिशानिर्देशों के तहत समृद्ध और अमीर वर्गों की अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के दायरे से बाहर रखा गया था।
केंद्र सरकार ने 2019 में दिल्ली की अनअथॉराइज्ड कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक देने के लिए पीएम-उदय योजना शुरू की। अप्रैल 2026 में केंद्र ने घोषणा की कि दिल्ली की 1731 पात्र कॉलोनियों में से 1511 को नियमित किया जाएगा। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के नियमों के मुताबिक सैनिक फार्म सहित 69 अमीर कॉलोनियों और वन/संरक्षित भूमि पर बसी कॉलोनियों को इस योजना से बाहर रखा गया है।
आलीशान घर लेकिन बेसिक नागरिक सुविधाओं का अभाव
सैनिक फार्म की सबसे अनोखी और अजीब स्थिति यह है कि यहां करोड़ों-अरबों रुपये की संपत्तियां मौजूद हैं, लेकिन कानूनी दर्जा न होने की वजह से यहां के निवासियों को दक्षिण दिल्ली की दूसरी बड़ी कॉलोनियों जैसी नागरिक सुविधाएं नहीं मिलतीं। इलाके के निवासियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए मुख्य रूप से अपनी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस पर निर्भर रहना पड़ता है। पानी के टैंकरों का इंतजाम, कम्युनिटी बोरवेल, सड़कों की मरम्मत, कचरा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था जैसे काम आरडब्ल्यूए ही संभालती है।
डीडीए की ओर से यहां अवैध निर्माण पर सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई भी जारी रहती है। इसी क्रम में अप्रैल में डीडीए द्वारा 23 फार्महाउसों को ध्वस्त किया गया थ, जबकि जून में भी एक संपत्ति को ध्वस्त और 10 अन्य को सील किया गया।
सैनिक फार्म मामले में अब गेंद पूरी तरह से सरकारी एजेंसियों के पाले में है। हाई कोर्ट द्वारा दी गई दो महीने की समयसीमा के बाद नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई से ही तय होगा कि दिल्ली के इस सबसे चर्चित 'अमीरों के अनअथॉराइज्ड ठिकाने' का भविष्य क्या होगा।