Delhi NCR Monsoon Watch: दिल्ली में मानसून एंट्री की नई डेट IMD ने बताई, 30 जून के भी पार जाएगा! जाने कब होगी मानसूनी बारिश की शुरुआत
Delhi NCR Monsoon Watch: दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत के लोगों को मानसून की फुहारों के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक दिल्ली में मानसून की एंट्री अपनी सामान्य तारीख से आगे बढ़ गई है।
दिल्ली में और बढ़ा मानसून का इंतजार, IMD ने बताई नई तारीख
Delhi-NCR Monsoon Watch: दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत के लोगों को मानसून की फुहारों के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक दिल्ली में मानसून की एंट्री अपनी सामान्य तारीख से आगे बढ़ गई है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि दिल्ली में मानसूनी बारिश की शुरुआत अब 30 जून के भी पार यानी अगले हफ्ते जुलाई के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। आईएमडी के मुताबिक एक्सटेंडेड फोरकास्ट पीरियड के दूसरे सप्ताह यानी 2 जुलाई से 8 जुलाई के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो रही हैं। आइए जानते हैं कि मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR सहित देश के अन्य हिस्सों में मानसून की दस्तक और बारिश की शुरुआत को लेकर क्या नया अनुमान जारी किया है।
दिल्ली में क्यों हो रही है मानसून की एंट्री में देरी?
आमतौर पर दिल्ली में मानसून के दस्तक देने की सामान्य तारीख 30 जून के आसपास होती है। इस बार मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। इस बार मानसून एंट्री की यह तारीख अब आगे खिसक कर जुलाई के पहले सप्ताह (2 से 8 जुलाई) में पहुंच गई है। मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान मौसमी परिस्थितियां उत्तर और मध्य भारत में लगातार नमी के प्रवाह और मानसूनी गतिविधियों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह मददगार साबित हो रही हैं।
अगले हफ्ते (2 से 8 जुलाई) के बीच क्यों मजबूत होगा मानसून?
IMD ने अपने बुलेटिन में उन प्रमुख भौगोलिक और वायुमंडलीय बदलावों का जिक्र किया है, जो अगले हफ्ते मानसून को तेजी से आगे बढ़ाएंगे।
सोमाली जेट: निचले क्षोभमंडल स्तर पर सोमाली जेट के और मजबूत होने की संभावना है। इससे दक्षिणी अरब सागर में क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो को बढ़ावा मिलेगा।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती परिसंचरण: जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर बंगाल की खाड़ी के निचले से मध्य क्षोभमंडल स्तरों पर एक असामान्य चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने की संभावना है।
पछुआ हवाओं का असर: देश के उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय हिस्सों में निचले क्षोभमंडल स्तरों पर पछुआ हवाएं हावी रहेंगी।
दूसरी मौसमी प्रणालियां: सक्रिय बंगाल की खाड़ी का परिसंचरण, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का सहायक चरण, तिब्बती एंटीसाइक्लोन का अपनी सामान्य स्थिति में अधिक स्पष्ट होना और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत पर ईस्ट-वेस्ट शियर जोन का विकसित होना मानसून को आगे ले जाने में मदद करेगा।
दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में कब से शुरू होगी बारिश?
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक 2 जुलाई से 8 जुलाई के बीच देश के इस बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज ऐसा रहेगा।
दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली सहित उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में इस अवधि के दौरान छिटपुट से लेकर काफी व्यापक रूप से हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश: वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और निचले क्षोभमंडल स्तर की पछुआ हवाओं के असर की वजह से जुलाई के पहले सप्ताह में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में कुछ दिनों के लिए अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने का अनुमान है।
देश के अन्य राज्यों में मानसून की क्या है स्थिति?
फिलहाल दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मंडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है।
पहले सप्ताह का अनुमान: मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान सप्ताह में मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात के कुछ और हिस्सों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बचे हुए हिस्सों, झारखंड और बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
दूसरे सप्ताह (2 से 8 जुलाई) का अनुमान: अगले हफ्ते परिस्थितियां और बेहतर होंगी। इससे मानसून मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के शेष बचे हुए हिस्सों में पूरी तरह प्रवेश कर जाएगा। इसके साथ ही जम्मू, कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान के कुछ और हिस्सों में भी मानसून अपनी दस्तक दे देगा।