भारत के उत्पादों पर 100 फीसदी अमेरिकी टैरिफ का खतरा, सीनेट में रूस सैंक्शन बिल पारित, जानिए क्या है पूरा मामला

Lindsey O Graham Sactioning Russia and Iran Act, 2026 अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में 86-11 वोट से पारित हो गया। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन 5 देशों के गुड्स पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा, जो रूस से ज्यादा क्रूड ऑयल और गैस खरीदते हैं

अपडेटेड Aug 08, 2026 पर 12:24 PM
अब यह बिल मंजूरी के लिए हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में पेश होगा। 31 अगस्त को सदन की बैठक होने वाली है।

अमेरिकी सीनेट ने रूस सैंक्शन बिल पारित कर दिया है। इससे भारत जैसे देशों के लिए परेशानी बढ़ जाएगी, जो रूस से क्रूड ऑयल खरीदते हैं। अमेरिकी सरकार के इस बिल का मकसद उन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाना है, जो रूस से सस्ता क्रूड ऑयल इंपोर्ट करते हैं। भारत के अलावा चीन भी अमेरिकी सरकार के इस बिल के निशाने पर है।

इस बिल के समर्थन में 86 सासंदों ने वोट दिए

इस बिल का नाम Lindsey O Graham Sactioning Russia and Iran Act, 2026 है। यह बिल अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में 86-11 वोट से पारित हो गया। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन 5 देशों के गुड्स पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा, जो रूस से ऑयल एंड गैस का इंपोर्ट करते हैं।


अब हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में पेश होगा यह बिल

अब यह बिल मंजूरी के लिए हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में पेश होगा। 31 अगस्त को सदन की बैठक होने वाली है। अमेरिका शुरू से देशों के रूस से क्रूड ऑयल और गैस खरीदने के खिलाफ रहा है। खासकर ट्रंप की ऐसे देशों पर टेढ़ी नजर रही हैं। उनका मानना है कि रूस कई देशों को डिस्काउंट पर क्रूड ऑयल और गैस बेचता है। फिर वह इस पैसे का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ लड़ने के लिए करता है।

भारत के अलावा इन 4 देशों के लिए मुसीबत पैदा करेगा यह बिल

रूस और यूक्रेन की लड़ाई बीते चार साल से ज्यादा समय से जारी है। रूस के यूक्रेन पर हमले शुरू करने के बाद अमेरिकी सहित यूरोपीय देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। लेकिन, उनका ज्यादा फायदा नहीं हुआ है। रूस और यूक्रेन की लड़ाई आज भी जारी है। अभी रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदने वाले देशों में भारत के अलावा चीन, अजरबाइजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं।

इन सासंदों ने तैयार किया है 100 फीसदी टैरिफ वाला यह बिल

इस बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथाल ने तैयार किया। 11 जुलाई को ग्राहम की कीव की यात्रा के दौरान अचानक मौत हो गई। इसके बाद अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों के नेताओं ने नए उत्साह को इस बिल को पारित कराने की कोशिशें शुरू की। हालांकि, कुछ डेमोक्रेट्स सासंदों का कहना है कि इस बिल के कानून बन जाने पर ट्रंप को नया टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।

जुलाई में भारत ने 50 फीसदी क्रूड का इंपोर्ट रूस से किया

इस बिल का पारित होना इंडिया के लिए अच्छी खबर नहीं है। इसकी वजह यह है कि इंडिया रूस से क्रूड ऑयल खरीदता है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के डेटा के मुताबिक, जुलाई में रूस से भारत का क्रूड ऑयल का इंपोर्ट बढ़कर 27.8 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) पहुंच गया। यह जून के मुकाबले 1.5 फीसदी ज्यादा है।

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यह बिल भारत की मुसीबत काफी ज्यादा बढ़ा सकता है

भारत के क्रूड ऑयल के कुल इंपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा हो गई है। जुलाई में भारत ने कुल 49.6 लाख बीपीडी क्रूड खरीदा। पश्चिम एशिया में टेंशन बढ़ने के बीच भारत ने रूस से क्रूड का इंपोर्ट बढ़ाया है। अमेरिका के नए कानून से भारत के लिए मुसीबत बढ़ सकती है।

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