अमेरिका-रूस के बाद भारत की वायु सेना सबसे ताकतवर, IAF ने 5वीं बार चीन को छोड़ा पीछे

WDMMA Global Airpower Ranking: रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन एयर फोर्स (IAF) ने 'वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ़ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ़्ट' (WDMMA) की 2026 की ग्लोबल एयरपावर रैंकिंग में एक बार फिर तीसरा स्थान हासिल किया है। 2022 के बाद से यह 5वीं बार है जब IAF ने चीन से आगे अपनी जगह बनाए रखी है।

अपडेटेड Jul 10, 2026 पर 11:42 PM
अमेरिका-रूस के बाद भारत की वायु सेना सबसे ताकतवर

WDMMA Global Airpower Ranking: रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन एयर फोर्स (IAF) ने 'वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट' (WDMMA) की 2026 की ग्लोबल एयरपावर रैंकिंग में एक बार फिर तीसरा स्थान हासिल किया है। 2022 के बाद से यह 5वीं बार है जब IAF ने चीन की 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स' (PLAAF) से आगे अपनी जगह बनाए रखी है।

ताजा रैंकिंग में IAF सिर्फ अमेरिका और रूस से पीछे है। WDMMA के आकलन में यह छठी बार है जब IAF को US एयर फोर्स, US नेवी, रूसी एयर फोर्स, US आर्मी और US मरीन कॉर्प्स के बाद रखा गया है।

बता दें कि WDMMA कुल 103 देशों की 129 एयर सेवाओं का मूल्यांकन करता है और 48,000 से ज्यादा विमानों को अपनी रैंकिंग में शामिल करता है। इसकी 'ट्रू वैल्यू रेटिंग' (TVR) प्रणाली के जरिए किसी भी वायु सेना की ताकत का आकलन किया जाता है। इसमें बेड़े (Fleet) का आकार, विमानों की क्षमता, आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक सपोर्ट और कुल सैन्य क्षमता को देखा जाता है।


इस रैंकिंग में सिर्फ फाइटर जेट की संख्या के बजाय फ्लीट मिक्स और खास एसेट्स - जैसे एरियल रिफ्यूलर, स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट, क्लोज-एयर-सपोर्ट प्लेटफॉर्म, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ट्रेनर – को ज्यादा अहमियत दी जाती है। इसमें एयर फोर्स के ऑर्डर बुक और देश में ही एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को भी ध्यान में रखा जाता है।

 1,716 एयरक्राफ्ट ऑपरेट करती है IAF

रिपोर्ट्स के मुताबिक, IAF अभी 1,716 एयरक्राफ्ट ऑपरेट करती है, जिनमें सात तरह के 542 फाइटर जेट शामिल हैं। इस संख्या में MiG-21 भी शामिल है, भले ही इसे सितंबर 2025 में रिटायर किया जाना है।

इस बेड़े में 498 हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं, जिनमें 222 Mi-17 और 111 HAL ध्रुव और रुद्र हेलीकॉप्टर हैं। इसके अलावा, 282 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 374 ट्रेनर (जिनमें से 325 खास तौर पर ट्रेनिंग के लिए हैं) और 20 स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट (जैसे एयरबोर्न अर्ली-वार्निंग, इंटेलिजेंस और एरियल रीफ्यूलिंग प्लेटफॉर्म) भी शामिल हैं।

IAF की तुलना USAF से की गई

रिपोर्ट में IAF की तुलना यूनाइटेड स्टेट्स एयर फोर्स (USAF) से भी की गई है। USAF के बेड़े में फाइटर जेट्स की हिस्सेदारी 32% है, और अगर बॉम्बर और क्लोज-एयर-सपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी इसमें शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा 41% तक पहुंच जाता है। वहीं, अमेरिकी वायु सेना में हेलीकॉप्टरों की हिस्सेदारी करीब 4%, ट्रांसपोर्ट विमानों की 14% और स्पेशल मिशन विमानों की हिस्सेदारी लगभग 14% है।

हालांकि, अच्छी रैंकिंग के बावजूद, रिपोर्ट में भारतीय वायु सेना की कुछ कमियों का भी जिक्र किया गया है। फिलहाल IAF के पास अभी 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि मंजूर की गई संख्या 42 है। हर स्क्वाड्रन में 18 एयरक्राफ्ट के हिसाब से, कुल 750 फाइटर एयरक्राफ्ट का लक्ष्य रखा गया है।

IAF को अभी हवा में ईंधन भरने वाले विमान (Mid-air Refuellers), एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&C), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और ISTAR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, टारगेट एक्विजिशन और टोही) विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

180 तेजस लड़ाकू विमान का ऑर्डर

इन कमियों को दूर करने के लिए भारतीय वायु सेना ने 180 तेजस Mk-1A लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया है। इसमें 83 और 97 विमानों की दो खेप शामिल हैं। पहले विमानों को अंतिम सिस्टम इंटीग्रेशन के बाद वायु सेना में शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा, 114 राफेल फाइटर जेट्स की प्रस्तावित खरीद से बेड़े में 294 एयरक्राफ्ट जुड़ सकते हैं, हालांकि 2030 के दशक में 200 से ज्यादा जगुआर, मिराज 2000 और MiG-29 एयरक्राफ्ट रिटायर होने वाले हैं। इसके साथ ही नए एयरबोर्न वॉर्निंग सिस्टम, टैंकर विमान और ISTAR प्लेटफॉर्म भी बेड़े में शामिल किए जा रहे हैं।

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