Henley Passport Index: अब 55 देशों में भारतीयों की होगी वीजा फ्री एंट्री, हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में 80वें स्थान के साथ बढ़ गई भारतीय पासपोर्ट की ताकत

Henley Passport Index: दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट्स की दौड़ में एशियाई देशों का दबदबा बरकरार है। सिंगापुर लगातार तीसरे वर्ष नंबर 1 पर बना हुआ है, जहां के नागरिक 192 देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश कर सकते है। जापान और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर है

अपडेटेड Jan 14, 2026 पर 1:47 PM
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भारत अब दुनिया के शक्तिशाली पासपोर्ट्स की सूची में 80वें स्थान पर पहुंच गया है

Henley Passport Index: भारतीय ट्रैवलर्स के लिए एक अच्छी खबर है। अब वो बिना किसी वीजा या पहले से भरे जाने वाले फॉर्म के ही कई देशों एंट्री कर सकते हैं। लंदन स्थित 'हेनले एंड पार्टनर्स' द्वारा जारी हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारतीय पासपोर्ट ने 5 पायदान की छलांग लगाई है। अब भारत दुनिया के शक्तिशाली पासपोर्ट्स की सूची में 80वें स्थान पर पहुंच गया है। साल 2025 में भारत की रैंकिंग 85वीं थी। इस सुधार के साथ, भारतीय नागरिक अब दुनिया के 55 देशों में वीजा फ्री या 'वीजा-ऑन-अराइवल' के यात्रा कर सकते हैं।

सिंगापुर लगातार तीसरे वर्ष बना नंबर 1

दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट्स की दौड़ में एशियाई देशों का दबदबा बरकरार है। सिंगापुर लगातार तीसरे वर्ष नंबर 1 पर बना हुआ है, जहां के नागरिक 192 देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश कर सकते है। जापान और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर है।


इन देशों में वीजा फ्री एंट्री ले सकते है भारतीय

भारतीय पासपोर्ट धारक अब इन देशों में आसानी से वीजा फ्री यात्रा कर सकते हैं:

एशिया: भूटान, नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, मालदीव और श्रीलंका।

मध्य पूर्व: कतर (वीजा-ऑन-अराइवल) और ईरान।

अफ्रीका: मॉरीशस, सेशेल्स, केन्या और तंजानिया।

कैरिबियन व अन्य: जमैका, फिजी, बारबाडोस और अल साल्वाडोर।

रैंकिंग में सुधार के क्या है मायने

हेनले एंड पार्टनर्स के चेयरमैन क्रिश्चियन एच. केलिन के अनुसार, पासपोर्ट की पॉवर किसी देश की राजनीतिक स्थिरता, राजनयिक विश्वसनीयता और आर्थिक प्रभाव को दर्शाती है। भारत की रैंकिंग में यह सुधार वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते राजनयिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा सुगमता की दिशा में एक पॉजिटिव कदम है। हालांकि, शीर्ष देशों की तुलना में अभी भी एक बड़ा अंतर बना हुआ है, जिसे पाटने के लिए और अधिक द्विपक्षीय समझौतों की आवश्यकता होगी।

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