India vs Pakistan Defence Budget: अक्सर हमारे मन ये सवाल उठता है कि, भारत या पाकिस्तान, किसकी सैन्य ताकत ज्यादा है? इसे लेकर एक लेटेस्ट रिपोर्ट आई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (Sipri) की रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले है। भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य ताकत की खाई अब और भी गहरी हो गई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा डिफेंस स्पेंडर बन गया है।
फिलहाल भारत का रक्षा बजट पाकिस्तान के मुकाबले करीब 8 गुना ज्यादा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत ने अपनी युद्धक क्षमता और हथियारों की खरीद में जबरदस्त तेजी दिखाई है।
दुनिया के टॉप 5 देशों में शामिल हुआ भारत
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में सैन्य खर्च के मामले में भारत अब केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी से पीछे है। नई दिल्ली का रक्षा बजट 8.9% की बढ़ोतरी के साथ 92.1 अरब डॉलर यानी करीब ₹7.70 लाख करोड़ तक पहुंच गया।दुनिया के कुल सैन्य खर्च में भारत की हिस्सेदारी अब 3.2% है। दूसरी ओर, पाकिस्तान का रक्षा बजट 11% बढ़कर महज 11.9 अरब डॉलर रहा, जो ग्लोबल रैंकिंग में 31वें स्थान पर है।
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद हुई भारी खरीद
पाकिस्तान के खिलाफ चले 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की तैयारियों को एक नई दिशा दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपनी लड़ाकू तैयारियों को बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर 'इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट' की है। युद्ध के लिए हर वक्त तैयार रहने के लिए भारत ने अत्याधुनिक मिसाइलें, ड्रोन और सर्विलांस सिस्टम को अपने बेड़े में शामिल किया है। फरवरी 2026 के बजट में सरकार ने इस सेक्टर के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछली बार से 15% अधिक है।
चीन से तनाव भी है बड़ी वजह
भारत के बढ़ते सैन्य बजट के पीछे केवल पाकिस्तान नहीं, बल्कि चीन के साथ चल रहा तनाव भी एक बड़ी वजह है। चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश है, जिसने 2025 में 7.4% की बढ़ोतरी के साथ 336 अरब डॉलर खर्च किए। चीन और पाकिस्तान की इस जुगलबंदी से निपटने के लिए भारत ने राफेल F4 फाइटर जेट, युद्धपोत, पनडुब्बी और स्मार्ट वेपन सिस्टम पर निवेश बढ़ाया है।
आयात में हुई कमी, लेकिन अब भी बड़ा खरीदार
भले ही भारत 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी हथियारों पर जोर दे रहा है, लेकिन वह अब भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है। भारत ने रूस पर अपनी निर्भरता काफी कम कर दी है। 2011-15 में रूस से 70% आयात होता था, जो 2021-25 में घटकर 40% रह गया है। भारत अब हथियार खरीदने के लिए इज़राइल, फ्रांस और अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों की ओर ज्यादा रुख कर रहा है।
वैश्विक सैन्य खर्च ₹240 लाख करोड़ के पार
दुनियाभर में अनिश्चितता और युद्ध के माहौल के बीच साल 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च 2.88 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब ₹241 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। इसमें 51% हिस्सा अकेले अमेरिका, चीन और रूस का है। यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध के चौथे साल में प्रवेश करने के कारण वहां के रक्षा बजट में 14% की सबसे तेज वृद्धि देखी गई है।