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एक जिद ने बदल दी कहानी, ऐसे खड़ी हुई गोपीचंद की मशहूर बैडमिंटन एकेडमी!

भारतीय बैडमिंटन के दिग्गज पुलेला गोपीचंद का सफर सिर्फ एक शानदार खिलाड़ी के तौर पर ही नहीं, बल्कि खेल को आगे बढ़ाने वाले कोच के रूप में भी खास रहा है। कभी कोर्ट पर उनकी कामयाबी के लिए फैंस की भीड़ जुटती थी, लेकिन बाद में उन्हें अपने काम और योगदान के बावजूद कई मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 17, 2026 पर 1:20 PM
एक जिद ने बदल दी कहानी, ऐसे खड़ी हुई गोपीचंद की मशहूर बैडमिंटन एकेडमी!

पुलेला गोपीचंद ने अपनी मेहनत से बदली एकेडमी की तस्वीर, तो साइना नेहवाल और पीवी सिंधु ने जीता मैडल

खेल की दुनिया में कामयाबी हासिल करना जितना मुश्किल होता है, उससे कहीं ज्यादा चुनौती भरा होता है उस कामयाबी के बाद भी अपने खेल से जुड़े रहना और आने वाली जनरेशन के लिए कुछ करना। पुलेला गोपीचंद की कहानी भी ऐसे ही सफर से जुड़ी है। बैडमिंटन कोर्ट पर देश का नाम रोशन करने के बाद उन्होंने अपना एक्सपीरियंस नई जनरेशन के खिलाड़ियों के साथ बांटने का फैसला किया। लेकिन कोच के रूप में आगे बढ़ने का उनका यह सफर कई उतार चढ़ाव से होकर गुजरा।

घर गिरवी रखकर शुरू किया बड़ा सपना

पुलेला गोपीचंद ने जब अपनी बैडमिंटन एकेडमी शुरू करने का फैसला किया, तब उनके लिए इसे पूरा करना आसान नहीं था। 2007-08 के दौरान एकेडमी की इमारत का कुछ हिस्सा तैयार हो चुका था, लेकिन कोर्ट बनाने और बाकी काम पूरा करने के लिए पैसों की जरूरत थी। जब उन्हें उम्मीद के मुताबिक मदद नहीं मिली, तो उन्होंने अपने हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित घर को गिरवी रखकर करीब 3 करोड़ रुपये का लोन लिया।

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