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अब IRCTC पर टिकट बुक करना होगा आसान! रेलवे बदल रहा 40 साल पुराना PRS सिस्टम...जानें क्या-क्या होगा बदलाव

रेलवे के नए बैकएंड सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा तत्काल टिकट की बुकिंग के दौरान देखने को मिल सकता है। तत्काल बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं। ऐसे समय में वेबसाइट पर काफी ज्यादा ट्रैफिक आ जाता है। नए पीआरएस को इसी तरह अचानक बढ़ने वाले ट्रैफिक को संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 11, 2026 पर 12:42 PM
अब IRCTC पर टिकट बुक करना होगा आसान! रेलवे बदल रहा 40 साल पुराना PRS सिस्टम...जानें क्या-क्या होगा बदलाव
भारतीय रेलवे के लाखों यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है।

भारतीय रेलवे के लाखों यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यह बदलाव भले ही पर्दे के पीछे हो रहा है, लेकिन इसका असर यात्रियों को टिकट बुक करते समय साफ तौर पर दिखाई दे सकता है। भारतीय रेलवे करीब 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) को नए और आधुनिक सिस्टम से बदल रहा है। नए सिस्टम को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यह एक साथ बड़ी संख्या में टिकट बुकिंग का दबाव संभाल सके। इसके अलावा टिकट और ट्रेन से जुड़ी जानकारी जल्दी मिल सकेगी और ऑनलाइन टिकट बुक करना भी आसान होगा।

यह बदलाव कई चरणों में धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। रेलवे की टिकट बुकिंग वेबसाइट आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट भी इसी बड़े बदलाव का हिस्सा है। यह अपग्रेड ऐसे समय में किया जा रहा है, जब ज्यादातर यात्री रिजर्व ट्रेन टिकट ऑनलाइन ही बुक कर रहे हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 से जून 2026 के बीच पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम के जरिए कुल 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी कुल रिजर्व टिकटों में करीब 89 फीसदी बुकिंग ऑनलाइन हुई।

PRS क्या है और रेलवे इसे क्यों बदल रहा है?

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम यानी पीआरएस भारतीय रेलवे का कंप्यूटर आधारित सिस्टम है। इसी के जरिए रिजर्व ट्रेन टिकटों से जुड़े ज्यादातर काम किए जाते हैं। इस सिस्टम की मदद से टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन, सीट और बर्थ का आवंटन, वेटिंग लिस्ट, आरएसी की स्थिति, रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने और यात्रियों को ट्रेन से जुड़ी जानकारी देने जैसे काम होते हैं।

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