भारत का पेट्रोल पंप नेटवर्क 1,00,000 के आंकड़े को पार कर गया है। यह आंकड़ा 2015 में पेट्रोल पंपों की संख्या से दोगुना है। सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने ग्रामीण और हाइवे वाले इलाकों में फ्यूल की पहुंच को और बढ़ाने के लिए आक्रामक तरीके से आउटलेट्स का विस्तार किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) से मिले डेटा के अनुसार, नवंबर के आखिर में देश में 1,00,266 पेट्रोल पंप थे। इस आंकड़े के साथ अब भारत पेट्रोल पंपों के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है। पहले नंबर पर अमेरिका और दूसरे पर चीन है।
2024 की एक रिपोर्ट में अमेरिका में रिटेल गैस स्टेशनों की संख्या 1,96,643 बताई गई थी। तब से कुछ आउटलेट्स बंद हो गए होंगे। चीन के मामले में पिछले साल की एक रिपोर्ट में गैस स्टेशनों की संख्या 1,15,228 बताई गई थी।
90 प्रतिशत से ज्यादा पंप सरकारी
भारत में 90 प्रतिशत से ज्यादा पेट्रोल पंप इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियों के हैं। IOCL के 41664 आउटलेट हैं। वहीं BPCL के 24605 और HPCL के 24418 आउटलेट हैं। रूस की रोसनेफ्ट के निवेश वाली नायरा एनर्जी लिमिटेड 6921 आउटलेट्स के साथ सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर है। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और BP के जॉइंट वेंचर के स्थान है, जिसके 2114 फ्यूल स्टेशन हैं। शेल के 346 आउटलेट्स हैं।
PPAC डेटा के अनुसार, भारत में 2015 में 50,451 पेट्रोल पंप थे। उस साल प्राइवेट कंपनियों के 2967 आउटलेट्स थे, जो कुल पेट्रोल पंपों का लगभग 5.9 प्रतिशत थे। फिलहाल, प्राइवेट पंप्स कुल मार्केट का 9.3 प्रतिशत हैं। फ्यूल रिटेल आउटलेट बिजनेस में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी वित्त वर्ष 2004 में 27 पंपों के साथ शुरू हुई थी।
29 प्रतिशत पंप ग्रामीण क्षेत्रों में
देश में कुल पेट्रोल पंपों में से लगभग 29 प्रतिशत ग्रामीण आउटलेट हैं। 10 साल पहले यह आंकड़ा 22 प्रतिशत था। इंडस्ट्री के अधिकारियों के अनुसार, भारत में फ्यूल रिटेलिंग में प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी सीमित रही है क्योंकि सरकार का कीमतों पर इनडायरेक्ट कंट्रोल है। सरकार रिटेलिंग कंपनियों में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी के जरिए इस पर कंट्रोल बनाए हुए है।