भारतीय आसमान पर दो दिग्गजों का कब्जा, इंडिगो और एयर इंडिया के पास है 91% डोमेस्टिक मार्केट हिस्सेदारी

India Domestic Aviation Market: आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी लगभग 64% थी, जो जनवरी 2026 में भी 63.6% पर बनी रही। वहीं एयर इंडिया ग्रुप की हिस्सेदारी 2025 में 27% थी, जो जनवरी 2026 में 26.5% रही

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 8:27 AM
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भारत के एविएशन मार्केट में इंडिगो का दबदबा कायम है

Domestic Aviation Market: भारत के घरेलू एविएशन बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म होती नजर आ रही है। केंद्र सरकार के राज्यसभा में दिए गए एक जवाब के अनुसार, देश के आसमान पर केवल दो एयरलाइन समूहों इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप का वर्चस्व है। ये दोनों मिलकर कुल बाजार हिस्सेदारी का 91 प्रतिशत हिस्सा ऑपरेट कर रही है।

इंडिगो नंबर 1, एयर इंडिया दूसरे स्थान पर

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष के एक सवाल के जवाब में यह आंकड़े पेश किए। आंकड़ों के मुताबिक, भारत के एविएशन मार्केट में इंडिगो का दबदबा कायम है। साल 2025 में इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी लगभग 64% थी, जो जनवरी 2026 में भी 63.6% पर बनी रही। वहीं एयर इंडिया ग्रुप जिसमें एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और विस्तारा शामिल है की हिस्सेदारी 2025 में 27% थी, जो जनवरी 2026 में 26.5% रही। बाकी बची सभी छोटी एयरलाइंस के पास बाजार का मात्र 9% हिस्सा ही बचा है।


दिसंबर 2025 के संकट में 3.64 लाख यात्री हुए थे परेशान

सरकार ने सदन में इंडिगो द्वारा की गई भारी उड़ानों की कटौती का कच्चा चिट्ठा भी खोला। अकेले दिसंबर 2025 में इंडिगो ने 5,689 घरेलू उड़ानें रद्द कीं। दिसंबर के केवल तीन दिनों के भीतर ही 3.64 लाख से ज्यादा यात्री उड़ानों में व्यवधान के कारण प्रभावित हुए। इन रद्दियों का मुख्य कारण पायलटों की शेड्यूलिंग में गड़बड़ी और नए 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस' (FDTL) नियमों का पालन न कर पाना बताया गया।

₹46 करोड़ से ज्यादा के मुआवजे का हुआ भुगतान

भारी हंगामे और उड़ानों के रद्द होने के बाद एयरलाइन ने हर्जाने के तौर पर बड़ी रकम चुकाई है। सरकार के अनुसार, इंडिगो ने अब तक मुआवजे के रूप में 4,620.5 लाख रुपये का भुगतान किया है। मंत्रालय ने कहा कि दिसंबर की मास कैंसिलेशन से जुड़े रिफंड प्रोसेस कर दिए गए हैं और पैसे ग्राहकों के मूल पेमेंट माध्यम में क्रेडिट कर दिए गए हैं।

सरकार पर इस बात के लिए उठ रहे सवाल

हैरानी की बात यह है कि सरकार के पास इस संकट के कई महत्वपूर्ण आंकड़ों का अभाव है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन-वार घाटे या यात्रियों पर पड़ने वाले कुल वित्तीय प्रभाव का डेटा नहीं दिया है। ऐसे ही उन यात्रियों का कोई आधिकारिक डेटा नहीं है जिन्हें रिफंड देने से मना कर दिया गया या जिन्हें वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई।

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