भारतीय नौसेना का नया समुद्री रक्षक स्वदेशी INS निपुण ताकत दिखाने को तैयार, जानें इस नए डाइविंग सपोर्ट वेसल की 8 बड़ी बातें
आईएनएस निपुण का इस्तेमाल गहरे समुद्र में गोताखोरी अभियानों, पानी के भीतर खोज व बचाव मिशनों और सैल्वेज गतिविधियों के संचालन के लिए किया जाएगा। इसकी क्षमताएं विशेष रूप से पनडुब्बियों और अन्य पानी के नीचे की संपत्तियों से जुड़ी आपात स्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय नौसेना डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) आईएनएस निपुण (INS Nipun) बेड़े में शामिल करने जा रही है।
भारतीय नौसेना अपनी पानी के अंदर की अपनी ताकत और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अपना दूसरा विशेष डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) आईएनएस निपुण (INS Nipun) बेड़े में शामिल करने जा रही है। इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में बनाया गया है। इस मॉडर्न पोत को 30 जुलाई को विशाखापत्तनम में औपचारिक रूप से नौसेना को सौंपा गया था। अब अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में मुंबई में आयोजित एक समारोह के दौरान इसे आधिकारिक तौर पर नौसेना में कमीशन किया जाएगा।
आईएनएस निपुण साल 2026 में भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला आठवां स्वदेशी प्लेटफॉर्म होगा। यह पोत देश में नौसेना के लिए जहाज बनाने के इकोसिस्टम को सपोर्ट करने के साथ साथ गहरे समुद्र में खोज, बचाव और पनडुब्बी राहत अभियानों की क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
1- क्या है आईएनएस निपुण?
आईएनएस निपुण एक विशेष डाइविंग सपोर्ट वेसल है। इसे गहरे समुद्र में गोताखोरी, खोज व बचाव अभियानों और डूबे हुए जहाजों या अवशेषों को बाहर निकालने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। यह HSL द्वारा भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया दूसरा डीएसवी है।
2- कब और कहां होगी कमीशनिंग?
हिंदुस्तान शिपयार्ड द्वारा नौसेना को सौंपे जाने के बाद, इस पोत को अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने की संभावना है। इसकी कमीशनिंग का औपचारिक समारोह मुंबई में आयोजित किया जाएगा।
3- किस काम आएगा यह नया वेसल?
आईएनएस निपुण का इस्तेमाल गहरे समुद्र में गोताखोरी अभियानों, पानी के भीतर खोज व बचाव मिशनों और सैल्वेज गतिविधियों के संचालन के लिए किया जाएगा। इसकी क्षमताएं विशेष रूप से पनडुब्बियों और अन्य पानी के नीचे की संपत्तियों से जुड़ी आपात स्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
4- कौन-कौन से आधुनिक उपकरणों से है लैस?
यह पोत मॉडर्न डाइविंग सिस्टम से पूरी तरह लैस है। इसमें गहरे समुद्र में सैचुरेशन डाइविंग की सुविधाएं और एक डेडिकेटेड साइड डाइविंग स्टेज भी शामिल है। इसके अलावा इसमें रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स भी लगे हैं, जो गोताखोरों की निगरानी करने और गहरे समुद्र के सैल्वेज मिशनों को अंजाम देने में मदद करते हैं।
5- पनडुब्बी बचाव मिशनों में कैसे करेगा मदद?
आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना के डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल के लिए एक मदर शिप के रूप में कार्य कर सकता है। इस क्षमता के बल पर किसी पनडुब्बी दुर्घटना या आपात स्थिति के दौरान यह नौसेना कर्मियों को तेजी से और सुरक्षित रूप से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाएगा।
6- कितना स्वदेशी है यह युद्धपोत?
आईएनएस निपुण में करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसका डिजाइन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग के नियमों के अनुसार किया गया है। इसका निर्माण रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को बड़ी मजबूती देता है।
7- भारतीय नौसेना के लिए क्यों है इसका महत्व?
यह पोत नौसेना की गहरे समुद्र में गोताखोरी, पनडुब्बी बचाव और पानी के भीतर सैल्वेज की क्षमताओं को काफी मजबूत करेगा। इसके साथ ही यह पानी के भीतर खोज व बचाव की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करते हुए समुद्री क्षेत्र में नौसेना के ऑपरेशन में सुधार लाएगा।
8- साल 2026 में शामिल हुए दूसरे 7 स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स
आईएनएस निपुण से पहले साल 2026 में भारतीय नौसेना में सात दूसरे स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स को शामिल किया जा चुका है। इस स्वदेशी इंडक्शन ड्राइव की शुरुआत 27 फरवरी को एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अंजदीप के साथ हुई थी। इसके बाद 3 अप्रैल को प्रोजेक्ट 17A स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी को शामिल किया गया।
21 जून को नौसेना ने एक साथ आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और 'आईएनएस अग्रय को कमीशन किया। इसके बाद 11 जुलाई को आईएनएस महेंद्रगिरी और 22 जुलाई को माहे-क्लास शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस मालवण को शामिल किया गया। आईएनएस निपुण के बेड़े में शामिल होने के साथ ही नौसेना का 2026 का स्वदेशी विस्तार कार्यक्रम भारत की घरेलू पोत निर्माण क्षमता को और अधिक विस्तार देगा।