IAF Officer Honey Trap: सोशल मीडिया पर एक महिला से हुई बातचीत धीरे-धीरे कथित तौर पर ‘हनी ट्रैप’ में बदल गई। इंडियन एयरफोर्स का एक विंग कमांडर पाकिस्तानी हनी ट्रैप का शिकार हुआ है। आरोप है कि इस दौरान भारतीय वायु सेना के एक विंग कमांडर ने महिला के साथ रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा कर दी। इंडियन एयरफोर्स की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब सवाल उठता है कि IAF का विंग कमांडर इस जाल में कैसे फंसा ?
मामले की जानकारी मिलने के बाद इंडियन एयरफोर्स की खुफिया शाखा ने दिल्ली पुलिस के साथ जरूरी जानकारी साझा की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने 30 मई की रात विंग कमांडर को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ सरकारी गोपनीयता कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 7 जुलाई को अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। अब इस मामले की सुनवाई अदालत में चल रही है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जांच में एक बड़े जासूसी नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इस नेटवर्क का मकसद देश की रणनीतिक सैन्य खुफिया जानकारी हासिल करना था।
चैट और वीडियो कॉल के जरिए बढ़ी नजदीकी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विंग कमांडर एक फील्ड यूनिट में तैनात थे। इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए एक महिला ने उनसे संपर्क किया। दोनों के बीच पहले चैट और फिर वीडियो कॉल के जरिए बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे महिला ने कथित तौर पर अधिकारी का भरोसा जीत लिया। आरोप है कि महिला ने विंग कमांडर से सैन्य गतिविधियों, सैनिकों की तैनाती और दूसरी अहम जानकारियों के साथ-साथ तस्वीरें और वीडियो भी साझा करने को कहा। जांचकर्ताओं के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि अधिकारी ने कथित तौर पर डिजिटल माध्यमों के जरिए महिला को महत्वपूर्ण दस्तावेज और डेटा भेजे थे।
डेटा चुराने वाला ऐप कैसे सामने आया
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि महिला ने कथित तौर पर विंग कमांडर से अपने एक साथी अधिकारी के मोबाइल फोन में एक खास ऐप इंस्टॉल करने को कहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, महिला ने पहले विंग कमांडर से जरूरी जानकारी हासिल की और इसके बाद उनसे दूसरे अधिकारी के फोन में यह ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा। जांचकर्ताओं का कहना है कि यह ऐप सामान्य ऐप नहीं था, बल्कि स्पाइवेयर या रिमोट एक्सेस मैलवेयर की तरह काम कर सकता था। ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल मोबाइल से डेटा चुराने, उसकी लोकेशन पता करने या बातचीत पर नजर रखने के लिए किया जा सकता है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी अधिकारी ने दूसरे अधिकारी के मोबाइल फोन में यह संदिग्ध ऐप इंस्टॉल किया था। जांच में इस ऐप की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस जांच में यह भी पता चला कि जब महिला ने विंग कमांडर से संपर्क किया था, उस समय वह अपनी निजी जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजर रहे थे।
पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की भूमिका की जांच
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए विंग कमांडर से संपर्क करने वाली महिला कथित तौर पर पाकिस्तान में बैठे कुछ हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रही थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी ने महिला के साथ कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की थी और क्या यह पूरा मामला किसी बड़े जासूसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियां विंग कमांडर और महिला के बीच हुई चैट, वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल बातचीत के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दोनों के बीच कब से संपर्क था और इस दौरान किस तरह की जानकारी साझा की गई।