I-PAC Raid Drama: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 जनवरी) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आरोपों को 'बहुत गंभीर' बताया। ED ने शीर्ष अदालत को बताया कि उसे कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मामले में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ऑफिस और उसके डायरेक्टर के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से बाधा का सामना करना पड़ा था। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि वह नोटिस जारी कर मामले की समीक्षा करना चाहती है।
पीठ ने मौखिक टिप्पणी की, "यह बहुत गंभीर मामला है। हम नोटिस जारी करेंगे। हमें इसकी समीक्षा करनी होगी।" शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ईडी की छापेमारी संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट में हुए हंगामे से वह अत्यंत व्यथित है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पॉलिटिकल कंसल्टिंग देने वाली कंपनी आई-पैक से जुड़े स्थानों पर ईडी की छापेमारी और जब्ती कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई अदालत कक्ष के भीतर अनियंत्रित अराजकता का हवाला देते हुए 14 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी थी।
ED का ममता सरकार पर गंभीर आरोप
ED ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि जांच एजेंसी की छापेमारी की कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की दखलअंदाजी और बाधा एक बेहद चौंकाने वाले चलन को दर्शाती हैं। ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि पहले भी अधिकारियों ने वैधानिक शक्ति का जब-जब प्रयोग किया, बनर्जी वहां पहुंचीं और उन्होंने दखलअंदाजी की। मेहता ने कहा, "यह एक बेहद चौंकाने वाले चलन को दर्शाता है।"
उन्होंने कहा कि इससे इस प्रकार के कृत्यों को और बढ़ावा मिलेगा। साथ ही केंद्रीय बलों का मनोबल गिरेगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "राज्यों को लगेगा कि वे दखल दे सकते हैं, चोरी कर सकते हैं और फिर धरने पर बैठ सकते हैं। एक मिसाल कायम की जानी चाहिए, जो अधिकारी वहां स्पष्ट रूप से मौजूद थे। उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए।" मेहता ने कहा कि ऐसे साक्ष्य हैं, जिनसे यह निष्कर्ष निकलता है कि आई-पैक कार्यालय में आपत्तिजनक सामग्री मौजूद थी।
उन्होंने कहा, "सक्षम अधिकारी को कार्रवाई का निर्देश दें और जो हो रहा है, कृपया उसका संज्ञान लें। हम यहां अपने अधिकारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए हैं। हम कानून के तहत काम कर रहे हैं। व्यक्तिगत लाभ के लिए जब्ती नहीं करते।"
मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा कि ईडी की याचिका पर सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग कलकत्ता हाई कोर्ट में दाखिल हो गए थे। इसके बाद मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। उन्होंने शीर्ष अदालत से कहा, "ऐसा तब होता है जब लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र ले लेता है।"
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मेहता की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पहले इस मामले की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट में होनी चाहिए। उचित न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ईडी समानांतर कार्यवाही कर रही है।
सिब्बल ने छापे की वीडियो रिकॉर्डिंग का भी हवाला देते हुए कहा, "यह सरासर झूठ है कि सभी डिजिटल उपकरण ले लिए गए थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सभी उपकरण ले जाए जाने का आरोप झूठ है, जिसकी पुष्टि ईडी के अपने पंचनामे से होती है।" उन्होंने कहा, "कोयला घोटाले में आखिरी बयान फरवरी 2024 में दर्ज हुआ था; तब से ईडी क्या कर रही थी? चुनावों के दौरान इतनी जल्दबाजी क्यों?" मामले की सुनवाई अभी जारी है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची है ED
शीर्ष अदालत में ED की यह याचिका आठ जनवरी की उन घटनाओं के बाद दायर की गई है। जब कोयला तस्करी मामले से जुड़ी जांच के सिलसिले में साल्टलेक स्थित आई-पैक के कार्यालय और कोलकाता में उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर ईडी के छापों के दौरान जांच एजेंसी के अधिकारियों को बाधाओं का सामना करना पड़ा था।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी परिसर में दाखिल हुईं और जांच से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य अपने साथ ले गईं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया है। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की जांच में बाधा डालने के आरोप से इनकार किया है। बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ एक FIR दर्ज की है।