Iranian Oil: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से उपजे ऊर्जा संकट के बीच भारतीय तेल बाजार के लिए एक बड़ी खबर आई है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरानी तेल पर लगी पाबंदियों में 30 दिनों की अस्थायी ढील दिए जाने के बाद, ट्रेडर्स ने भारतीय रिफाइनरियों को ईरानी कच्चा तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, यह तेल 'डिस्काउंट' के बजाय 'ऊंची' दरों पर ऑफर किया जा रहा है।
प्रीमियम पर मिल रहा है ईरानी तेल
आमतौर पर प्रतिबंधों के समय ईरान अपना तेल सस्ते में बेचता था, लेकिन मौजूदा वैश्विक संकट को देखते हुए स्थिति बदल गई है। सूत्रों के अनुसार, ईरानी तेल को ICE ब्रेंट क्रूड से $6-$8 प्रति बैरल के प्रीमियम यानी ऊंची कीमत पर ऑफर किया गया है। इसके साथ ही ट्रेडर्स ने शर्त रखी है कि कार्गो पहुंचने के 7 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। भारत ने मई 2019 के बाद से अमेरिकी दबाव के चलते ईरान से एक भी तेल की खेप नहीं खरीदी है, लेकिन अब युद्ध के कारण उपजे संकट ने समीकरण बदल दिए हैं।
अमेरिका ने दी थी 30 दिन की 'छूट'
ऊर्जा संकट और आसमान छूती कीमतों को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने बीते दिनों ईरान के लिए एक स्पेशल 'वेवर' जारी किया। यह छूट केवल उन जहाजों पर लागू होगी जो 20 मार्च या उससे पहले लोड हुए हैं और 19 अप्रैल तक अनलोड हो जाएंगे। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य समुद्र में मौजूद तेल को बाजार में लाना है ताकि सप्लाई की कमी को दूर किया जा सके।
डॉलर ही नहीं, रुपये में भी हो सकेगा भुगतान
ईरान और भारत के बीच व्यापार में सबसे बड़ी बाधा पेमेंट सिस्टम रहा है। नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) और ट्रेडर्स डॉलर में भुगतान चाहते हैं, लेकिन कुछ पक्ष भारतीय रुपये में भी पेमेंट लेने को तैयार हैं। चूंकि ईरान SWIFT सिस्टम से बाहर है, इसलिए भारतीय रिफाइनरियां किसी भी सौदे पर हस्ताक्षर करने से पहले एक सुरक्षित 'पेमेंट मैकेनिज्म' सुनिश्चित करना चाहती हैं।
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह सौदा?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। भारत न केवल कच्चे तेल, बल्कि खाना पकाने वाली गैस (LPG) की भी भारी कमी का सामना कर रहा है।ईरान भारत के भौगोलिक रूप से काफी करीब है, जिससे परिवहन का समय और खर्च कम लगता है।