JD Vance’s India visit: जेडी वेंस की भारत यात्रा पर क्यों हैं करीबी नजरें, इससे इंडिया को क्या फायदा होगा?

JD Vance India visit: जेडी वेंस की पत्नी भारतीय मूल की हैं, जो उनके साथ इंडिया आई हैं। इससे इस यात्रा के साथ भारतीय लोगों के जज्बात भी जुड़ गए हैं। वेंस की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सरकार से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल लोगों के साथ होने वाली है

अपडेटेड Apr 21, 2025 पर 11:56 AM
अमेरिका की दिलचस्पी इंडिया के बाजार में है। Tesla सहित कई अमेरिकी कंपनियां इंडियन मार्केट में एंट्री चाहती हैं।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 21 अप्रैल को इंडिया पहुंच चुके हैं। उनकी चार दिन की इंडिया यात्रा पर करीबी निगाहें लगी हैं। इस पर चीन सहित कई देशों की नजरें हैं। दरअसल, वेंस की यह यात्रा ऐसे वक्त हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से दुनियाभर में उथलपुथल मची हुई है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के 3 महीने के अंदर वेंस का इंडिया आना इस बात का संकेत है कि अमेरिका के लिए इंडिया की कितनी ज्यादा अहमियत है।

टैरिफ मसले का होगा समाधान

JD Vance की पत्नी भारतीय मूल की हैं, जो उनके साथ इंडिया आई हैं। इससे इस यात्रा के साथ भारतीय लोगों के जज्बात भी जुड़ गए हैं। वेंस की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सरकार से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल लोगों के साथ होने वाली है। बातचीत में उन मसलों का समाधान निकल सकता है, जो अभी भारत और अमेरिका के बीच गतिरोध बने हुए हैं। इंडिया उन देशों में शामिल हैं, जिन्हें ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ से 90 दिन की राहत दी है।


इंडिया के साथ रिश्ते बढ़ाने में दिलचस्पी

वेंस से बातचीत में सबसे ज्यादा फोकस दोनों देशों के बीच टैरिफ का ऐसा समाधान तलाशने पर होगा, जो भारत और अमेरिका दोनों के लिए फायदेमंद होगा। इंडिया ट्रंप की टैरिफ का समाधान बातचीत से निकालने की इच्छा जता चुका है। इसलिए इस बात की काफी ज्यादा उम्मीद है कि वेंस की यह यात्रा भारत और अमेरिका के बीच किसी ठोस समझौते के लिए रास्ता पूरी तरह से साफ कर देगी।

रेसिप्रोकल टैरिफ से बचने के लिए जून तक समझौता

सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने ब्लूमबर्ग को बताया कि कुछ खास सेक्टर पर टैरिफ को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत इस हफ्ते ही होने वाली है। दोनों देश मई के अंत तक टैरिफ को लेकर द्विपक्षीय समझौते के पक्ष में हैं। अगर इंडिया को अमेरिका के 26 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ से बचना है तो जून के अंत तक दोनों देशों के बीच समझौता होना जरूरी है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण IMF की बैठक में शामिल होने के लिए अमेरिका जाने वाली हैं। वहां उनकी बातचीत अमेरिकी सरकार के सीनियर अधिकारियों से होने वाली है।

इंडियन मार्केट में अमेरिकी कंपनियों की एंट्री

अमेरिका की दिलचस्पी इंडिया के बाजार में है। Tesla सहित कई अमेरिकी कंपनियां इंडियन मार्केट में एंट्री चाहती हैं। इस दिशा में कई सालों से अमेरिकी कंपनियां कोशिश कर रही हैं। टेस्ला के सीईओ Elon Musk के ट्रंप की सरकार में बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बाद अब अमेरिकी सरकार भी इंडिया पर अपने मार्केट ओपन करने के दबाव बढ़ाना चाहती है। बताया जाता है कि मस्क ने पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की है। मस्क के इस साल के अंत में भारत आने का भी प्लान है। टेस्ला इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कपनी है। इंडियन मार्केट में एंट्री मिलने से कंपनी को काफी फायदा होगा।

मौका नहीं चूकना चाहता भारत

वेंस जयपुर और आगरा भी जाने वाले हैं। भारत इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता है। अगर इंडिया द्विपक्षीय समझौते के लिए अमेरिका को मनाने में कामयाब हो जाता है तो उसका एक बड़ा मकसद पूरा हो जाएगा। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते टकराव की स्थिति में इंडिया के लिए बड़ा मौका बन सकता है।

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चीन के पर कतरने में ट्रंप की दिलचस्पी

ट्रंप भी चीन की ताकत घटाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते दिख रहे हैं। ऐसे में अमेरिका के साथ समझौते से एक तरफ अमेरिका बाजारों में इंडियन प्रोडक्ट्स की पहुंच बढ़ेगी तो दूसरी तरफ इंडिया की चाइना प्लस वन पॉलिसी परवान चढ़ती दिखेगी। दुनियाभर खासकर अमेरिकी कंपनियां चीन की जगह इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग करना चाहेंगी। इससे इंडिया में निवेश बढ़ेगा। इससे नौकरी के मौके भी बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर नौकरी के पर्याप्त मौके नहीं पैदा करने के आरोप लगते रहे हैं।

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