गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार छा जाती है। भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में आम के दीवाने बड़ी तादात में देखने को मिल जाएंगे। कई लोग तो मजाक में यहां तक कहते हैं कि उन्हें गर्मी सिर्फ इसलिए पसंद है क्योंकि इस मौसम में आम खाने को मिलता है। वहीं दुनियाभर में भारतीय आम के तो लाखों लोग दीवाने हैं। अपनी मिठास, स्वाद और लोकप्रियता के कारण भारतीय आमों ने लोगों की दिलों में एक अलग ही जगह बनाया है। वहीं भारत से विदेशों में जाने वाली आमों की लिस्ट में अब एक और नाम जुड़ गया है। झारखंड के सिमडेगा जिले से यूनाइटेड किंगडम को 'आम्रपाली' आमों की पहली खेप भेजा गया है।
अब यूके में बिकेंगे झारखंड के आम
एक अधिकारी ने बताया कि झारखंड के सिमडेगा जिले से यूनाइटेड किंगडम (यूके) को 'आम्रपाली' आमों की पहली खेप भेजना राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की कोशिशों का सकारात्मक परिणाम है। सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह ने बताया कि किसानों से आम 42 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदे गए, जो स्थानीय बाजार में मिलने वाली कीमत की तुलना में काफी बेहतर है। हाल ही में जिले की महिलाओं द्वारा संचालित एक किसान उत्पादक कंपनी ने 1.33 टन 'आम्रपाली' आमों की पहली खेप यूनाइटेड किंगडम भेजी। इस उपलब्धि को किसानों, खासकर महिला किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। किसानों से आम की खरीद 42 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की गई, जो स्थानीय बाजार की तुलना में बेहतर मूल्य है।
सिमडेगा ने बनाई अलग पहचान
किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी और सिमडेगा को कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान भी मिलेगी। राज्य सरकार की प्रमुख योजना बीएचजीवाई के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं और इस उपलब्धि को सिमडेगा के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। कंचन सिंह ने कहा, "हमारी महिला किसानों द्वारा उगाए गए आम्रपाली आमों का यूनाइटेड किंगडम तक पहुंचना उनकी मेहनत और बेहतर गुणवत्ता का प्रमाण है। मैं कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) का विशेष धन्यवाद करती हूं। उनके सहयोग से हमारे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का मौका मिला है।"
सरकार की इस योजना का मिला लाभ
झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के तहत बीएचजीवाई पहल शुरू की है। इस योजना के जरिए झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों को पूरे जिले में 3,100 एकड़ से अधिक भूमि पर आम की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना ने बंजर और कम उपयोग वाली जमीन को फलदार बागों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन बागों में अधिक उत्पादन देने वाली आम की किस्में लगाई गई हैं, जिससे किसानों को बेहतर आय मिल रही है।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं और वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह योजना किसानों के लिए लंबे समय तक स्थायी आय का स्रोत भी तैयार कर रही है।
इस वर्ष आम की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। उपायुक्त ने बताया कि जिले में करीब 300 मीट्रिक टन आम का उत्पादन होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि महिला किसानों को आम की खेती, फलों की तुड़ाई और सुरक्षित भंडारण की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान फलों की गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने कहा, "निर्यात के लिए भेजे जाने वाले आमों की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना होगा। साथ ही, आम जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए उसका सही तरीके से भंडारण करना भी बेहद जरूरी है, ताकि उसकी गुणवत्ता बनी रहे और किसानों को बेहतर लाभ मिल सके।"