July WPI Data : जुलाई, 2026 में थोक महंगाई दर पिछले महीने के 9.9 फीसदी से घटकर 9.8 फीसदी पर रही है। लेकिन इस गिरावट के बावजूद यह लगातार तीसरे महीने 9 फीसदी से ऊपर बनी रही है। जुलाई थोक महंगाई दर (WPI) 9.78 फीसदी पर रही है। हालांकि, इसके 10.10 फीसदी पर रहने का अनुमान था। वहीं,मार्च, 2026 में देश की थोक महंगाई दर 9.87 फीसदी पर रही थी। जुलाई की थोक महंगाई दर जून के मुकाबले 0.09% कम रही है।
जुलाई में खाने-पीने के चीजों की थोक महंगाई दर मार्च के 6.14 फीसदी से बढ़कर 6.65 फीसदी पर रही है। वहीं, प्राइमरी आर्टिकल की थोक महंगाई दर 7 फीसदी से बढ़कर 8.52 फीसदी पर रही है। जबकि, फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर पिछले महीने के 27.7 फीसदी से घटकर 20.05 फीसदी पर रही है। दूसरी तरफ मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर मार्च के 7.48 फीसदी से बढ़कर 8.29 फीसदी रही है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए शुरुआती अनुमानों के अनुसार,जुलाई 2026 में सभी कमोडिटीज़ का थोक मूल्य सूचकांक (WPI) 110.0 रहा, जबकि जून में यह 110.2 था। सरकार में कहा है कि जुलाई में WPI महंगाई ऊंची रहने की मुख्य वजह मिनरल ऑयल,खाने-पीने की चीज़ें,बेसिक मेटल का प्रोडक्शन,खाने-पीने की चीजो के अलावा अन्य सामान,खाने-पीने के प्रोडक्ट्स का प्रोडक्शन और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का प्रोडक्शन रही।
WPI फ़ूड इंडेक्स (इसमें प्राइमरी आर्टिकल्स ग्रुप से खाने-पीने की चीजें और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स ग्रुप से मैन्युफैक्चर्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स शामिल हैं)में जुलाई में सालाना आधार पर महंगाई दर 6.65 फीसदी दर्ज की गई,जबकि जून में यह 6.14 फीसदी पर थी।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि जुलाई में सभी कमोडिटीज का ऑल-इंडिया आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स 109.9 पर रहा था। जून के मुकाबले इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स जुलाई में 105.9 पर रहा है।
इस हफ्ते की शुरुआत में जारी आंकड़ों से पता चला कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने के कारण भारत में खुदरा महंगाई दर जून के 4.38 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 4.45 प्रतिशत हो गई है।
रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने इस महीने की शुरुआत में बेंचमार्क पॉलिसी दरों को 5.25 फीसदी पर ही बनाए रखा और अल-नीनो के असर के चलते दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में कमजोरी और असमान बारिश का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए रिटेल महंगाई दर 5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।
बताते चलें के थोक महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक महंगाई बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहती है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि,सरकार भी टैक्स कटौती एक सीमा तक ही कम कर सकती है।