मिट्टी के नीचे छुपा था जुर्म, 10 महीने बाद जमीन से निकला कंकाल!सामने आई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

पुलिस के अनुसार, यह कंकाल 45 साल की रेशमा का है, जो सात बच्चों की मां थी। रेशमा करीब 10 महीने पहले अचानक गायब हो गई थी। उसके बेटे बबलू ने जब पड़ोस में रहने वाले गोरेलाल से अपनी मां के बारे में पूछा, तो उसने बड़ी बेरुखी से कहा, "तेरी माँ अब कभी वापस नहीं आएगी

अपडेटेड Jan 08, 2026 पर 5:27 PM
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Kanpur: मिट्टी के नीचे छुपा था जुर्म, 10 महीने बाद जमीन से निकला कंकाल!

कल रात जब पूरा शहर नींद की आगोश में जाने की तैयारी कर रहा था, तब कानपुर के टिकवापुर गांव में पुलिस की गाड़ियों की हेडलाइट्स और मोबाइल की टॉर्च की रोशनी एक सनसनीखेज सच को बेनकाब कर रही थी। कड़ाके की ठंड और गांव के टावर के पास पसरे सन्नाटे के बीच जब मजदूरों ने जमीन खोदना शुरू किया, तो 7 फीट नीचे जो मिला उसने सबके होश उड़ा दिए।

मिट्टी के नीचे से एक इंसान का कंकाल बरामद हुआ, जिसके साथ दबी थी- प्यार, पागलपन, नफरत और धोखे की एक खौफनाक कहानी।

पुलिस के अनुसार, यह कंकाल 45 साल की रेशमा का है, जो सात बच्चों की मां थी। रेशमा करीब 10 महीने पहले अचानक गायब हो गई थी। उसके बेटे बबलू ने जब पड़ोस में रहने वाले गोरेलाल से अपनी मां के बारे में पूछा, तो उसने बड़ी बेरुखी से कहा, "तेरी माँ अब कभी वापस नहीं आएगी।"


शुरुआत में बबलू को लगा कि गोरेलाल मजाक कर रहा है, लेकिन जब भी मां का जिक्र आता, गोरेलाल अपनी बात घुमा देता। इसी शक के आधार पर बबलू ने 29 दिसंबर को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसने इस हत्याकांड की परतें खोल दीं।

अवैध संबंध और रिश्तों में दरार

रेशमा के पति रामबाबू की मौत तीन साल पहले हो गई थी। उनके चार बेटे और तीन बेटियां थीं। पति की मौत के बाद रेशमा का झुकाव अपने पड़ोसी और रिश्ते में देवर लगने वाले गोरेलाल की तरफ बढ़ गया। रेशमा अपने बच्चों को छोड़कर गोरेलाल के साथ रहने लगी। मां के इस फैसले से नाराज बच्चों ने उससे सारे रिश्ते तोड़ लिए थे।

शादी का वो बुलावा और शक की सुई

भले ही बच्चे नाराज थे, लेकिन 29 नवंबर को परिवार में एक शादी के लिए बबलू ने अपनी मां को न्योता भेजा। जब रेशमा शादी में नहीं पहुंची, तो बबलू का माथा ठनका। वह गोरेलाल के घर गया, जहां उसे फिर वही जवाब मिला, "वो कभी नहीं लौटेगी।" इसी खामोशी ने पुलिस के लिए रास्ते खोल दिए।

पुलिस हिरासत में आने के बाद गोरेलाल टूट गया और उसने जो बताया वो रूह कंपा देने वाला था।

दरअसल पिछले साल अप्रैल में दोनों के बीच झगड़ा हुआ। गोरेलाल रेशमा से पीछा छुड़ाना चाहता था और उसे रिश्तेदारों के पास जाने को कह रहा था। रेशमा के इनकार करने पर गुस्से में गोरेलाल ने उसका गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

गोरेलाल ने दो दिनों तक लाश को घर के अंदर ही रखा। उसने पहले लाश को नहर में फेंकने की सोची, लेकिन उसे डर था कि लाश तैरकर ऊपर आ जाएगी। आखिर में उसने गांव के सुनसान इलाके में टावर के पास गड्ढा खोदकर उसे दफन कर दिया।

ज्वेलरी से हुई पहचान

डिप्टी कमिश्नर (DCP) दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया, "आरोपी गोरेलाल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। जमीन से बरामद कंकाल के पास मिले कपड़ों और जेवरों के आधार पर परिजनों ने रेशमा की पहचान की है। DNA टेस्ट और पोस्टमार्टम के लिए अवशेषों को फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया है।"

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