Karnataka Congress Crisis: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बड़ी राहत मिली है। वह फिलहाल सीएम की कुर्सी पर बने रहेंगे। कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को कांग्रेस नेतृत्व ने मंगलवार (1 जुलाई) को खारिज कर दिया है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार (1 जुलाई) को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान किया। ये घोषणा कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर असंतोष और अटकलों के संकेतों के बीच हुई है। विधायकों के साथ एक बैठक के बाद नेतृत्व परिवर्तन की खबरों पर विराम लगाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि सीएम बदलने के बारे में कोई प्रस्ताव या चर्चा नहीं हुई है।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की बात सिर्फ कल्पना है। राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को राज्य इकाई के भीतर बढ़ती बेचैनी और आंतरिक कलह को दूर करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने बेंगलुरु भेजा था। सुरजेवाला ने कहा कि फिलहाल कर्नाटक नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हम अपने विधायकों के साथ बैठक कर उनके क्षेत्रों में किए गए कार्यों का मूल्यांकन कर रहे हैं। हम कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन पर राय नहीं ले रहे हैं।
सुरजेवाला का यह बयान सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर आंतरिक गुटबाजी को लेकर कई दिनों से चल रही राजनीतिक चर्चा के बाद आया है। कुछ विधायक नेतृत्व पर कथित तौर पर राज्य में फेरबदल के लिए दबाव डाल रहे थे। हाईकमान ने अनिश्चितता को समाप्त करते हुए डीके शिवकुमार को कर्नाटक की कमान देने से इनकार कर दिया है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और कांग्रेस के कर्नाटक मामलों के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन राज्य के सत्तारूढ़ दल के विधायकों के साथ बैठकों का सिलसिला जारी रखा। पार्टी सूत्रों ने बताया कि सुरजेवाला तीन दिनों तक विधायकों के साथ एक-एक कर बैठक करेंगे।
इसके पहले चरण के तहत सुरजेवाला ने मंगलवार को बेंगलुरु शहर, बेंगलुरु ग्रामीण, बेंगलुरु दक्षिण, चामराजनगर, मैसूरु जिलों के अलावा दक्षिण कन्नड़ और कोलार के करीब 20 विधायकों से मुलाकात की। उन्होंने सोमवार को चिकबल्लापुर और कोलार जिलों के विधायकों के साथ बैठक की।
कगवाड़ से विधायक राजू कागे के भी पार्टी महासचिव से मिलने की उम्मीद है। कागे ने सरकार के कामकाज और मंत्रियों से संपर्क न होने को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। कागे ने विकास कार्यों और कोष जारी करने में देरी का हवाला देते हुए इस्तीफा देने का संकेत दिया था।
उनके अनुसार, बैठकें विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं की स्थिति को समझने के लिए की जा रही हैं क्योंकि सरकार ने अपने कार्यकाल के दो साल पूरे कर लिए है। इसका उद्देश्य विधायकों के संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस संगठन की स्थिति का आकलन करना है।