कर्नाटक सरकार ने वाहनों का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट चेक (पीयूसी) जारी करने वाले अधिकृत केंद्रों की जांच फीस में बदलाव किया है। नई दरें 15 अगस्त से लागू हो गई हैं। नई दरों के अनुसार, दोपहिया वाहनों की प्रदूषण जांच फीस 65 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये कर दी गई है। वहीं, ऑटो रिक्शा की जांच फीस 75 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये कर दी गई है। पेट्रोल, एलपीजी और सीएनजी से चलने वाली कारों की जांच फीस अब 115 रुपये की जगह 150 रुपये होगी। जबकि डीजल से चलने वाले वाहनों के लिए यह फीस 160 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई है।
कर्नाटक में गाड़ी का PUC कराना हुआ महंगा!
सरकार ने परिवहन आयुक्त और सड़क सुरक्षा आयुक्त के प्रस्ताव के बाद 13 अगस्त को पीयूसी जांच फीस बढ़ाने का आदेश जारी किया। यह बदलाव कर्नाटक उत्सर्जन जांच केंद्र मालिक संघ की मांग के बाद किया गया है। संघ ने लंबे समय से मौजूदा फीस में बदलाव की मांग की थी। पीयूसी प्रमाणपत्र आमतौर पर छह महीने तक मान्य होता है। हालांकि, बीएस-4 और बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा करने वाले वाहनों के लिए नियमों के तहत पीयूसी की वैधता एक साल तक हो सकती है। कर्नाटक उत्सर्जन जांच केंद्र मालिक संघ के अध्यक्ष योगेश ने फीस बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि फीस में बदलाव की मांग काफी समय से की जा रही थी और यह फैसला पहले ही हो जाना चाहिए था।
बाइक-कार समेत जानें किस वाहन के लिए कितने रुपये देने होंगे
सरकार ने कहा कि संचालन लागत बढ़ने की वजह से पीयूसी जांच की फीस बढ़ाना जरूरी हो गया था। इन लागतों में कच्चे माल, पेट्रोल-डीजल की कीमत, प्रदूषण जांच केंद्रों का किराया, इंटरनेट से जुड़े उपकरणों का रखरखाव, प्रिंटर की स्याही, बिजली का खर्च और कर्मचारियों की सैलरी शामिल है। सरकार ने बताया कि नई फीस को कर्नाटक मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 231-बी(13) के तहत लागू किया गया है। नई दर के मुताबिक फीस लेने का अधिकार सिर्फ कंप्यूटर से चलने वाले अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्रों को होगा। यह फीस केवल वाहनों के उत्सर्जन की जांच करने और पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ली जाएगी।
आदेश में प्रदूषण जांच केंद्रों के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी तय की गई हैं। केंद्रों को प्रदूषण जांच के लिए प्रशिक्षित और योग्य कर्मचारियों को नियुक्त करना होगा। साथ ही, गैस की जांच करने वाली मशीन यानी गैस एनालाइजर की समय-समय पर सही तरीके से री-कैलिब्रेशन करानी होगी। केंद्र पर गैस एनालाइजर की सबसे हाल की री-कैलिब्रेशन की तारीख और समय साफ तौर पर दिखाई देने वाली जगह पर लगाना जरूरी होगा। इसके अलावा, पीयूसी प्रमाणपत्र में किसी भी तरह की हाथ से लिखी गई एंट्री या बदलाव नहीं किया जा सकेगा। केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 115 के मुताबिक, पीयूसी प्रमाणपत्र केवल उन्हीं वाहनों को जारी किया जा सकता है जिनका प्रदूषण स्तर तय सीमा के अंदर हो। आदेश में यह भी बताया गया है कि वाहन की श्रेणी और उसके उत्सर्जन मानकों के आधार पर पीयूसी प्रमाणपत्र कितने समय तक मान्य रहेगा, इसकी अवधि अलग-अलग हो सकती है।