बिहार के लीची किसानों की परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक्शन लिया है। लीची किसानों को हो रही परेशानियों को देखते हुए केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को बड़ा आदेश दिया। लीची की फसल को ‘लीची स्टिंक बग’ नाम के कीट से हो रहे नुकसान को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। किसानों की शिकायतों के बाद शिवराज सिंह चौहान ने विशेषज्ञों की एक विशेष टीम बनाने को कहा है। यह टीम प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी और स्थिति का जायजा लेकर किसानों की मदद के लिए जरूरी सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
सरकार ने दिया ये बड़ा आदेश
बता दें कि, यह मामला 7 मई को लखनऊ में स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम के दौरान सामने आया। इस कार्यक्रम में किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बताया कि ‘लीची स्टिंक बग’ की वजह से लीची की फसल को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों की परेशानी सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने तुरंत इस मामले पर कार्रवाई की और अधिकारियों को विशेषज्ञों की एक विशेष टीम बनाने के निर्देश दिए।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत आने वाले राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर ने 7 मई को एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि बनाई गई विशेष टीम ‘लीची स्टिंक बग’ से जुड़ी मौजूदा स्थिति की जांच करेगी। यह टीम प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी, फसल को हुए नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करेगी और किसानों को राहत देने के लिए तुरंत और लंबे समय के उपाय सुझाएगी। इसके अलावा, यह टीम किसानों के लिए जरूरी सलाह और जागरूकता कार्यक्रमों की सिफारिश भी करेगी। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार को जरूरी कदम उठाने के सुझाव भी देगी।
टीम में शामिल होंगे ये एक्सपर्ट
आदेश के मुताबिक, इस विशेष विशेषज्ञ टीम में अलग-अलग संस्थानों के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक को इस टीम का अध्यक्ष बनाया गया है। इस टीम में बिहार सरकार के बागवानी विभाग और कृषि विभाग के प्रतिनिधियों के साथ कई कृषि विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इसके अलावा डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कीट विज्ञान विशेषज्ञों को भी टीम में जगह दी गई है।
कई बागानों के 90 प्रतिशत फल हुए बर्बाद
बता दें कि, कीटों का प्रकोप इतना ज्यादा है कि मुजफ्फरपुर में करीब 40 प्रतिशत लीची के फसल पर इसका असर पड़ा है। इलाके के कुछ बाग ऐसे भी मिले जहां करीब 90 प्रतिशत तक लीची के फल खराब हो चुके हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि फूल आने और शुरुआती फल बनने के समय कीटों के तेज हमले की वजह से यह स्थिति बनी है। अधिकारियों ने बताया कि पहले यह समस्या पूर्वी चंपारण के मेहसी इलाके तक सीमित थी, लेकिन अब इसका असर मीनापुर तक पहुंच गया है। मीनापुर के करीब 60 प्रतिशत लीची बागानों में इस साल फूल ही नहीं आए। जहां मंजर आए भी, वहां कीटों ने फसल को नुकसान पहुंचा दिया। मीनापुर में लगभग 700 एकड़ में लीची की खेती होती है। इनमें से करीब 200 एकड़ की फसल पूरी तरह ‘स्टिंक बग’ की चपेट में आ गई है। कई बाग ऐसे हैं जहां इस बार लीची के फल नहीं लगे।