Parliament Budget Session 2026: लोकसभा ने गुरुवार (5 फरवरी) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब दिए बिना ही विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया। धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में हुई चर्चा का प्रधानमंत्री द्वारा सदन में जवाब देने की परंपरा है। लेकिन गतिरोध की स्थिति के बीच प्रधानमंत्रीमोदी का जवाब लोकसभा में नहीं हुआ। फिर पीएम मोदी के जवाब दिए बिना ही प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।
विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के कारण एक बार के स्थगन के बाद बैठक दोपहर 12 बजे शुरू हुई तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने आवश्यक दस्तावेज पेश कराए। उन्होंने आसन के समीप प्रदर्शन कर रहे विपक्ष के सांसदों को बैनर नहीं दिखाने को कहा। शोर-शराबे के बीच ही उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 28 जनवरी को लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में दिए गए अभिभाषण पर निचले सदन में लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन के समक्ष रखा।
हंगामे के बीच ही सभा ने ध्वनिमत से प्रस्ताव को पारित कर दिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सदन में धन्यवाद प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सर्वानंद सोनोवाल ने सोमवार को रखा था। जबकि इसका अनुमोदन करते हुए बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने अपने विचार रखे थे।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के एक अप्रकाशित किताब के हवाले से चीन के साथ टकराव का मुद्दा उठाने का प्रयास किया। लेकिन स्पीकर बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी।
इस मुद्दे पर सदन में पिछले चार दिन से गतिरोध की स्थिति बनी रही। मंगलवार को आसन के समीप हंगामे के दौरान कागज उछालकर आसन की ओर फेंकने के मामले में विपक्ष के आठ सदस्यों को निलंबित कर दिया गया। बुधवार को चर्चा में तेलुगु देशम पार्टी के (TDP) के सांसद जीएम हरीश बालयोगी और BJP सांसद निशिकांत दुबे ने हिस्सा लिया।
दुबे ने कुछ किताबों का जिक्र करते हुए नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधा। इस दौरान कई तरह के गंभीर आरोप लगाए। आसन ने दुबे को नियम का हवाला देते हुए किसी किताब को दिखाने या उसका उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी। विपक्ष के सदस्यों ने दुबे के आरोपों पर जोरदार हंगामा किया।
लोकसभा के अलावा राज्यसभा में भी गुरुवार को भारी हंगामा हुआ। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की प्रकाशित किताब के अंश पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई जिसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया। उच्च सदन की बैठक शुरू होने के कुछ बाद कांग्रेस सदस्यों ने मांग की है कि पहले सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने दिया जाए।