तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि लोकसभा की सीटें बढ़ाने के मामले में दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय न हो, इसके लिए पूरे देश स्तर पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने बाकी दक्षिण राज्यों- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिख कर इस मुद्दे पर एक साथ आवाज उठाने की अपील की।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई जाए। रेवंत रेड्डी ने जोर देकर कहा कि इतना बड़ा फैसला केवल तभी लिया जाना चाहिए जब सभी राज्यों की राय ली जाए और व्यापक सहमति बन जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने यह पत्र बड़ी जिम्मेदारी और जल्दबाजी से लिखा है, क्योंकि यह मुद्दा भारतीय लोकतंत्र के भविष्य पर दूरगामी असर डालने वाला है।
उन्होंने बताया कि अभी तीन अलग-अलग मुद्दे - महिलाओं का आरक्षण, परिसीमन (delimitation) और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना, जो एक साथ जोड़ दिए गए हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है। उन्होंने साफ किया कि ये तीनों पूरी तरह अलग-अलग मुद्दे हैं।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के 33% आरक्षण का पूरा समर्थन करती है। उन्होंने मांग की कि यह आरक्षण मौजूदा 543 सीटों में ही तुरंत लागू कर दिया जाए। इसके लिए सीटें बढ़ाने का इंतजार नहीं करना चाहिए। साथ ही यह आरक्षण सभी राज्य विधानसभाओं में भी लागू होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में ज्यादा जगह देना सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए नैतिक जरूरत है।
'दक्षिण राज्यों को होगा ज्यादा नुकसान'
परिसीमन के बारे में उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी कई बार परिसीमन सिर्फ सीटों की सीमाएं दोबारा तय करके किया गया था, बिना सीटों की संख्या बढ़ाए। उन्होंने सुझाव दिया कि देश में फिर से ऐसा ही किया जा सकता है।
लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव को उन्होंने सबसे विवादित मुद्दा बताया। उन्होंने चिंता जताई कि अतिरिक्त सीटें आबादी के अनुपात में बांटने से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि वे महिलाओं का आरक्षण और परिसीमन तो चाहते हैं, लेकिन कुल सीटों की संख्या बढ़ाए बिना।
स्टालिन, चंद्रबाबू, सिद्धारमैया को भी लिखा पत्र
एक अलग पत्र में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को लिखा और दक्षिण के सभी राज्यों से समन्वय बनाने की अपील की। उन्होंने इसे “छिपे हुए तरीके से” आबादी आधारित मॉडल लाने की कोशिश बताया।
उन्होंने 2025 में चेन्नई में हुई परिसीमन बैठक का जिक्र किया और कहा कि दक्षिण के राज्यों को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए।
रेवंत रेड्डी ने समझाया कि भले ही हर राज्य की सीटें बढ़ जाएं, लेकिन दक्षिण और उत्तर के राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का फर्क और बढ़ जाएगा।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के बीच का अंतर और ज्यादा हो जाएगा, जिससे दक्षिण राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो जाएगा।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने आंध्र प्रदेश के CM एन चंद्रबाबू नायडू और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को भी पत्र लिखा है।