इंदौर के बाद महू में हड़कंप! दूषित पानी पीने से 9 लोग अस्पताल में भर्ती, प्रशासन में मची अफरा-तफरी

महू की विधायक उषा ठाकुर ने भी प्रभावित लोगों से मिलने के लिए अस्पताल पहुंचीं। कलेक्टर वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग को सभी मरीजों के लिए उचित और प्रभावी इलाज करने का निर्देश दिया है और महू कैंट बोर्ड को क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता की जांच करने और स्वच्छता बनाए रखने का निर्देश दिया है

अपडेटेड Jan 23, 2026 पर 11:04 AM
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मध्य प्रदेश के महू में दूषित पानी पीने से 9 लोग अस्पताल में भर्ती, प्रशासन में मची अफरा-तफरी (FILE PHOTO)

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि मध्य प्रदेश के इंदौर जिले की महू तहसील में दूषित पानी पीने के सेवन से कम से कम नौ लोग बीमार पड़ गए हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार रात को पट्टी बाजार और चंदर मार्ग इलाकों से पानी से होने वाली बीमारियों के मामले सामने आए। एक अधिकारी ने बताया कि इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा देर रात महू पहुंचे और एक अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों से मुलाकात की और प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से बात की।

NDTV के मुताबिक, उन्होंने बताया कि नौ मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ अन्य घर पर ही स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसनी के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग के कर्मी शुक्रवार सुबह से ही घटनास्थल पर मौजूद हैं।

उन्होंने बताया कि इंदौर मेडिकल कॉलेज और दूसरे विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम को भी घटनास्थल पर भेजा जा रहा है।


महू की विधायक उषा ठाकुर ने भी प्रभावित लोगों से मिलने के लिए अस्पताल पहुंचीं।

कलेक्टर वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग को सभी मरीजों के लिए उचित और प्रभावी इलाज करने का निर्देश दिया है और महू कैंट बोर्ड को क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता की जांच करने और स्वच्छता बनाए रखने का निर्देश दिया है।

वर्मा ने कहा कि सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है।

उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाकों का सर्वे किया जाएगा और लक्षण दिखने वाले निवासियों को उचित उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, और गंभीर रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल कोई भी मरीज गंभीर हालत में नहीं है और उनमें से कुछ को दिन के दौरान छुट्टी दे दी जाएगी।

पिछले महीने, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पानी के दूषित होने से कई लोग बीमार पड़े और सात लोगों की मौत हो गई।

हालांकि इलाके के निवासियों का दावा है कि इस बीमारी से अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की ओर से 15 जनवरी को हाई कोर्ट में पेश रिपोर्ट में पांच महीने के एक बच्चे सहित सात मौतों का जिक्र किया गया है।

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