सभी भारतीयों में 'महादेव का DNA', जामिया के VC मजहर आसिफ के बयान पर मचा बवाल! समर्थन में आई BJP

जामिया के VC ने अपने बयान में कहा कि भारत में भले ही धर्म, भाषा और संस्कृति अलग-अलग हों, लेकिन सबके भीतर “महादेव का DNA” है। इस पर कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों ने तालियां भी बजाईं, लेकिन छात्र संगठनों ने इसे गलत और “अवैज्ञानिक” बताया

अपडेटेड Apr 30, 2026 पर 5:33 PM
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सभी भारतीयों में 'महादेव का DNA', जामिया के VC मजहर आसिफ के बयान पर मचा बवाल! समर्थन में आई BJP

जामिया मिलिया इस्लामिया के वाइस चांसलर मजहर आसिफ के एक बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि “सभी भारतीयों में महादेव का DNA है”, जिसके बाद कैंपस में विरोध शुरू हो गया और राजनीतिक बहस भी तेज हो गई।

यह बयान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) से जुड़े ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम के दौरान दिया गया था। जैसे ही इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

वीसी ने अपने बयान में कहा कि भारत में भले ही धर्म, भाषा और संस्कृति अलग-अलग हों, लेकिन सबके भीतर “महादेव का DNA” है। इस पर कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों ने तालियां भी बजाईं, लेकिन छात्र संगठनों ने इसे गलत और “अवैज्ञानिक” बताया।


छात्रों का विरोध

वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने इस बयान का कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि यह वैज्ञानिक सोच के खिलाफ है और संविधान की भावना से मेल नहीं खाता।

SFI ने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों पर प्रशासन ने सख्ती की, उन्हें खींचा-पीटा गया और कार्रवाई की गई। साथ ही उन्होंने कैंपस में RSS से जुड़े कार्यक्रम कराने पर भी सवाल उठाए।

बीजेपी का समर्थन

वहीं बीजेपी के अमित मालवीय ने वीसी के बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस बयान को शाब्दिक रूप में नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह एक प्रतीकात्मक बात है, जो भारत की साझा संस्कृति और पहचान को दर्शाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयान “वैज्ञानिक दावे” नहीं बल्कि सांस्कृतिक विचार होते हैं, जो लोगों को जोड़ने का काम करते हैं।

राजनीतिक बहस भी तेज

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि देश के विश्वविद्यालयों को राजनीतिक मंच बनाया जा रहा है।

वहीं बीजेपी नेता ईश्वर सिंह ठाकुर ने RSS के कार्यक्रम का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के लिए किए जा रहे हैं।

यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे कैंपस की राजनीति, अभिव्यक्ति की आजादी, और शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है।

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