आम खाने के हैं शौकीन तो जेब ढीली करने के लिए हो जाइए तैयार, मलिहाबाद में मौसम ने बिगाड़ा दशहरी आम का खेल

Mango Price Hike: बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और मौसम में अचानक हुए बदलाव के कारण आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश देश के कुल आम उत्पादन में करीब 25 से 28 प्रतिशत योगदान देता है। लेकिन मलिहाबाद समेत कई बड़े आम उत्पादक इलाकों में इस बार लगभग 60 प्रतिशत तक फसल खराब हो गई है। फसल कम होने का असर बाजार में भी दिख रहा है

अपडेटेड May 25, 2026 पर 4:40 PM
इस बार आसमान छू रहे हैं मलिहाबाद के दशहरी आम! जानें

देश में फिलहाल भीषण गर्मी पड़ रही है और आम लोगों का हाल बेहाल है। भले की गर्मी का मौसम हर साल लोगों को ऐसे ही सताता हो पर कई लोगों आम की वजह से इस सीजन का इंतजार करते हैं। इसलिए भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है। देश के कई हिस्सों में आम की अपनी एक पहचान भी है और उसे पंसद करने वाले लोग भी। कई लोगों को बनारस का लगड़ा आम पसंद है तो कुछ लोगों को मशहूर दशहरी आम ही भाता है। वहीं इस गर्मी में उत्तर प्रदेश के मशहूर दशहरी आम खरीदना लोगों को थोड़ा महंगा पड़ सकता है।

आम पर मौसम की मार

बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और मौसम में अचानक हुए बदलाव के कारण आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश देश के कुल आम उत्पादन में करीब 25 से 28 प्रतिशत योगदान देता है। लेकिन मलिहाबाद समेत कई बड़े आम उत्पादक इलाकों में इस बार लगभग 60 प्रतिशत तक फसल खराब हो गई है। फसल कम होने का असर बाजार में भी दिख रहा है। इस सीजन में अच्छी गुणवत्ता वाले दशहरी आमों की कीमत बढ़कर करीब 80 से 110 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।


मंहगे हुए दशहरी आम 

किसानों और व्यापारियों का कहना है कि इस बार आम की फसल कम होने से प्रीमियम दशहरी आमों के दाम पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ सकते हैं। जो आम पहले 30 से 50 रुपये प्रति किलो मिल जाते थे, वे अब जून के पीक सीजन में 80 से 110 रुपये प्रति किलो तक बिक सकते हैं। लखनऊ के पास मलिहाबाद, माल और काकोरी इलाके दशहरी आम के लिए काफी मशहूर हैं। यहां बड़े पैमाने पर अच्छी गुणवत्ता वाले और निर्यात योग्य आम पैदा किए जाते हैं।

40 प्रतिशत पेड़ों पर ही आए फल

मलिहाबाद के नबी नगर गांव के अनुभवी किसान कासिम रजा ने न्यूज18 को बताया, “इस साल सिर्फ करीब 40 प्रतिशत पेड़ों पर ही फल आए हैं।” 75 साल के कासिम रज़ा पिछले करीब 50 वर्षों से आम की खेती कर रहे हैं। उनके पास 20 बीघा जमीन में फैले बड़े आम के बाग हैं। पेड़ों पर कम फल लगने की वजह से किसान काफी परेशान हैं। एक आम उत्पादक ने बताया, “पहले हमारे बाग के आम विदेशों तक भेजे जाते थे, लेकिन इस साल फसल बहुत कम है। ऐसे में शायद हम सिर्फ लखनऊ के स्थानीय बाजारों में ही आम बेच पाएंगे।”

वहीं मलिहाबाद के मुजसा गांव के पूर्व प्रधान और आम किसान मोहम्मद मियां ने कहा कि इस बार मौसम की मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि बाजार में दशहरी आम की मांग बहुत ज्यादा है, लेकिन पेड़ों पर फल कम आए हैं। उनके मुताबिक, बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान ने आम में फूल आने की प्रक्रिया को काफी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा, “आम के दाम बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन कई किसानों के पास इतनी फसल ही नहीं बची कि वे अपनी लागत तक निकाल सकें।”

मलिहाबादी दशहरी आमों की खूब मांग

मोहम्मद मियां ने आगे कहा कि 1 जून के बाद पेड़ों पर प्राकृतिक तरीके से पके दशहरी आम बाजार में आने लगेंगे। उन्होंने बताया कि इन आमों का स्वाद और खुशबू ही लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आती है, जिसकी वजह से उत्तर भारत के कई राज्यों से खरीदार मलिहाबाद पहुंचते हैं। उन्होंने कहा, “मलिहाबादी दशहरी का असली स्वाद जून में आता है। जब आम पेड़ों पर पूरी तरह पकता है, तब उसकी मिठास और खुशबू का कोई मुकाबला नहीं होता। लेकिन इस साल फसल कम है, इसलिए लोगों को ज्यादा कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

बेमौसम बारिश और  तूफान और भीषण गर्मी का असर

आस-पास के कई आम के बागों में इस बार पेड़ों पर बहुत कम फल दिखाई दे रहे हैं। किसान रईस अहमद ने बताया कि इस साल आम का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले मुश्किल से 40 प्रतिशत ही हुआ है। उन्होंने कहा, “सिर्फ तूफान और बारिश ही इसकी वजह नहीं हैं। आम के पेड़ों का भी एक प्राकृतिक चक्र होता है। एक साल पेड़ों पर ज्यादा फल आते हैं, तो अगले साल पैदावार कम हो जाती है।”रईस अहमद ने यह भी बताया कि कुछ किसान ज्यादा उत्पादन के लिए ‘कल्टार’ जैसे ग्रोथ रेगुलेटर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि ऐसे रसायन लंबे समय में पेड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस साल की शुरुआत में जब आम के पेड़ों पर सबसे ज्यादा फूल आए थे, उसी समय लगातार दो दिनों तक घना कोहरा छाया रहा। इसके कुछ दिन बाद इलाके में बेमौसम बारिश भी हो गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन मौसम बदलावों ने आम के फूलों को काफी नुकसान पहुंचाया।

रहमानखेड़ा स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एच.एस. सिंह ने बताया कि शुरुआत में इस बार आम की बंपर पैदावार की उम्मीद थी, क्योंकि पेड़ों पर बहुत ज्यादा फूल आए थे। उन्होंने कहा, “जब पेड़ों पर सबसे ज्यादा फूल थे, तभी घना कोहरा पड़ गया। इससे फूलों पर नमी जमने लगी और फिर अचानक बारिश हो गई। आम के फूलों पर पानी पड़ना उनके लिए लगभग जहर जैसा असर करता है।”

यूपी में 58 लाख टन आम की पैदावार

पिछले साल भारत में करीब 2.5 करोड़ टन आम का उत्पादन हुआ था। इसी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश बना रहा। अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 58 लाख टन आम पैदा हुआ, जिसमें से करीब 30 प्रतिशत उत्पादन लखनऊ क्षेत्र से आया था। मलिहाबाद, जो अपने मशहूर दशहरी आमों के लिए जाना जाता है, करीब 46 हजार बीघा जमीन में फैला हुआ है। यहां 100 से ज्यादा बड़े बाग हैं और लगभग 2,000 किसान परिवारों की रोजी-रोटी आम की खेती पर निर्भर है। ये परिवार पिछले 100 साल से भी ज्यादा समय से आम उगा रहे हैं। लेकिन इस बार मौसम की मार ने आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में इस गर्मी लोगों को ‘फलों का राजा’ आम सच में राजाओं वाली कीमत पर खरीदना पड़ सकता है।

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