Chabahar Port: भारत ने चाबहार पोर्ट से अपना कंट्रोल छोड़ दिया? विदेश मंत्रालय ने दी ये बड़ी जानकारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि, "28 अक्टूबर 2025 को, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सशर्त प्रतिबंधों में छूट के बारे में गाइडेंस देते हुए एक लेटर जारी किया, जो 26 अप्रैल, 2026 तक वैलिड है। हम इस व्यवस्था पर काम करने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं

अपडेटेड Jan 16, 2026 पर 6:55 PM
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भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।

ईरान में जारी अशांति ने एक बार फिर भारत की महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजना को भी गहरा झटका लगा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें कहा गया है कि ईरान के चाबहार पोर्ट को बनाने में भारत की 10 साल पुरानी भागीदारी लगभग खत्म हो गई है। बता दें कि भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। वहीं अब चाबहार पोर्ट पर भारतीय विदेश मंत्रायल ने बड़ा बयान दिया है।

चाबहार पोर्ट पर आया बड़ा बयान 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि, "28 अक्टूबर 2025 को, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सशर्त प्रतिबंधों में छूट के बारे में गाइडेंस देते हुए एक लेटर जारी किया, जो 26 अप्रैल, 2026 तक वैलिड है। हम इस व्यवस्था पर काम करने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं।" बता दें कि, ट्रंप ने 12 जनवरी को कहा था कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश को ' अमेरिका के साथ किए जा रहे किसी भी और सभी बिजनेस पर' 25 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि निश्चित रूप से, अमेरिका ने 29 सितंबर, 2025 से बंदरगाह पर फिर से प्रतिबंध लगाकर भारत की रणनीतिक चाल को कमजोर कर दिया था।


भारत के लिए महत्वपूर्ण है ये पोर्ट 

बता दें कि चाबहार पोर्ट, भारत की मध्य एशिया तक पहुंचने की उस ‘लाइफलाइन’ का सवाल है, जिसे लंबे समय की मेहनत के बाद तैयार किया गया है। यह परियोजना भारत को न केवल व्यापारिक लाभ देती है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में पाकिस्तान और चीन के प्रभाव को संतुलित करने का एक ठोस जरिया भी प्रदान करती है। इस पोर्ट को भारत ने करीब 4,200 करोड़ रुपये खर्च कर बनाया है।

ईरान की स्थिति पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमारे लगभग 9,000 नागरिक अभी ईरान में रह रहे हैं। उनमें से ज़्यादातर छात्र हैं... वहां हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए, हमने दो या तीन एडवाइजरी जारी की हैं। इन एडवाइजरी में, हमने भारत में अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे इस समय ईरान की यात्रा न करें, और हमने ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि वे जो भी साधन उपलब्ध हों, उनसे देश छोड़ दें। हम वहां की स्थिति पर कड़ी नज़र रख रहे हैं और जहां तक ​​हमारे नागरिकों की बात है, हम उनकी भलाई के लिए जो भी ज़रूरी होगा, वह करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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