Cabinet Decision: भारतीय रेलवे के इन 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर्स को 4 लाइन बनाने की मंजूरी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया पूरा प्लान
Modi Cabinet Decisions: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार (9 सितंबर) को सात रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद ज्यादा ट्रैफिक वाले रेल कॉरिडोर को मजबूत करना है
Modi Cabinet Decisions: मंत्रिमंडल ने मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर खड़गपुर और झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेलवे लाइन को भी मंजूरी दे दी है
Railway Network Projects Cabinet Decision: भारतीय रेलवे अपने सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर (High Density Corridors) की क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी में है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (9 सितंबर) को बताया कि इन प्रमुख रेल रूट्स को क्वाड्रुपल यानी चार पटरियों वाला बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना, ट्रेनों की आवाजाही को सुचारु बनाना और भविष्य में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाना है।
रेल मंत्री के मुताबिक, रेलवे के इन हाई डेंसिटी कॉरिडोर पर करीब 2,000 किलोमीटर की लाइन को पहले ही क्वाड्रुपल किया जा चुका है। इसके अलावा लगभग 5,000 किलोमीटर के हिस्से का काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है। जबकि करीब 4,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन को फाइनल मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है।
इन शहरों को होगा फायदा
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सात रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद ज्यादा ट्रैफिक वाले रेल कॉरिडोर को मजबूत करना है। मंजूर किए गए रूट में कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर खड़गपुर और झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेलवे लाइन को भी मंजूरी दे दी है। 367 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 6,528 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
करीब 11 हजार km रेल नेटवर्क पर बड़ा विस्तार
रेल मंत्री के बयान के मुताबिक, अलग-अलग चरणों को जोड़ें तो करीब 11,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर चार पटरियों की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और महानगरीय क्षेत्रों के बीच रेल कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे के हाई डेंसिटी कॉरिडोर देश के सबसे अधिक व्यस्त रेल रूट्स में शामिल हैं। इन रूटों पर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां चलती हैं। मौजूदा ट्रैक क्षमता पर दबाव के कारण कई बार ट्रेनों को प्राथमिकता देने, क्रॉसिंग और संचालन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं। चार पटरियां होने से एक ही दिशा में ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।
मालगाड़ियों की रफ्तार और क्षमता बढ़ाने पर भी जोर
रेलवे के लिए यह विस्तार केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं है। देश में माल ढुलाई को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी अतिरिक्त रेल क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। ज्यादा ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के बीच कम रोकना पड़ेगा और माल परिवहन की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।
रेल मंत्री ने बताया कि इसका सीधा असर कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। रेलवे के लिए माल ढुलाई से होने वाली आय भी महत्वपूर्ण है। इसलिए हाई डेंसिटी रूटों की क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
ट्रेनों की आवाजाही होगी ज्यादा सुचारु
क्वाड्रुपलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही रेल कॉरिडोर पर अलग-अलग तरह की ट्रेनों को चलाने के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। इससे व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा। रेलवे का लक्ष्य भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए अभी से इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। करीब 2,000 किमी काम पूरा, 5,000 किमी पर काम या मंजूरी और 4,000 किमी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में होना इस बड़े विस्तार की व्यापकता को दर्शाता है।
रेल नेटवर्क को भविष्य के लिए तैयार करने की कवायद
रेल मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क के आधुनिकीकरण, ट्रैक क्षमता बढ़ाने और तेज रेल परिवहन की दिशा में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। हाई डेंसिटी कॉरिडोर की क्वाड्रुपलिंग से रेलवे को न केवल मौजूदा ट्रैफिक संभालने में मदद मिलेगी। बल्कि आने वाले वर्षों में नई यात्री ट्रेनों और अधिक मालगाड़ियों को चलाने के लिए अतिरिक्त क्षमता भी मिल सकती है।