OSM विवाद पर सरकार का बड़ा एक्सशन, CBSE चेयरमैन और सचिव का तबादला, हाई लेवल जांच कमेटी भी बनाई

इस साल सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की परीक्षाओं की कॉपियों को जांचने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को बड़े पैमाने पर लागू किया था। इस डिजिटल सिस्टम के तहत कॉपियों को स्कैन करके कंप्यूटर या टैबलेट की स्क्रीन पर जांचा जाता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन रिजल्ट आने के बाद देश भर से कई छात्रों और अभिभावकों ने इसमें भारी खामियों की शिकायत की

अपडेटेड Jun 02, 2026 पर 6:43 PM
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OSM विवाद पर सरकार का बड़ा एक्सशन, CBSE चेयरमैन और सचिव का तबादला

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। केंद्र सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक कदम के तहत सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। यह कार्रवाई बोर्ड की परीक्षाओं में कॉपियों के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल होने वाली एक खास डिजिटल प्रणाली में आई गड़बड़ियों के बाद की गई है। 12वीं परीक्षा के ऑन स्क्रीन मार्किंग विवाद की जांच के लिए भी सरकार ने एक समिति बनाई है।

राहुल सिंह सीबीएसई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) थे। उनकी जिम्मेदारी बोर्ड के पूरे कामकाज और प्रशासन की निगरानी करना था। जबकि हिमांशु गुप्ता CBSE के सचिव और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी थे। वे कानूनी मामलों, ऑडिट, जनसंपर्क और प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करते थे।

क्या है पूरा मामला?


दरअसल, इस साल सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की परीक्षाओं की कॉपियों को जांचने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को बड़े पैमाने पर लागू किया था। इस डिजिटल सिस्टम के तहत कॉपियों को स्कैन करके कंप्यूटर या टैबलेट की स्क्रीन पर जांचा जाता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन रिजल्ट आने के बाद देश भर से कई छात्रों और अभिभावकों ने इसमें भारी खामियों की शिकायत की।

छात्रों का आरोप था कि कुछ कॉपियों के पन्ने धुंधले थे, कुछ पन्ने गायब थे और कई जगह कॉपियों को ठीक से जांचा ही नहीं गया था। इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी काफी विवाद खड़ा हो गया था।

टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

विवाद सिर्फ बच्चों की कॉपियों तक ही सीमित नहीं रहा। इस ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सर्विस को जिस निजी कंपनी को सौंपने का ठेका दिया गया था, उसकी खरीद प्रक्रिया पर भी नियमों के उल्लंघन और शर्तों में ढील देने के गंभीर आरोप लगे।

सरकार ने बिठाई उच्च स्तरीय जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया है। इस पूरी खरीद प्रक्रिया और डिजिटल सिस्टम में हुई कमियों की गहराई से जांच करने के लिए एक हाई-लेवल इंक्वायरी कमेटी भी बना दी गई है।

यह कमेटी अब इस बात की जांच करेगी कि इस डिजिटल सर्विस को खरीदने के नियमों में कोई हेराफेरी तो नहीं हुई थी और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए कौन जिम्मेदार है। सरकार का कहना है कि वे इस सिस्टम में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहते हैं, ताकि छात्रों का भरोसा बोर्ड पर बना रहे।

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