Mohan Bhagwat: 'भारत में रहने वाला हर कोई हिंदू है...'; RSS प्रमुख मोहन भागवत ने पहली बार 4 किस्म के हिंदुओं के बारे में बताया
Mohan Bhagwat Hindus: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (8 फरवरी) को कहा कि भारत का वैश्विक नेतृत्व भाषणों से नहीं, बल्कि उदाहरण से तय होगा। उन्होंने देश में हिंदुओं की चार मुख्य कैटेगरी के बारे में बताया। RSS प्रमुख ने कहा कि पहले समूह में वे लोग शामिल हैं जो गर्व से अपनी हिंदू पहचान को खुलकर बताते हैं
RSS चीफ मोहन भागवत ने हिंदुओं के लेकर एक बड़ा बयान दिया है
Mohan Bhagwat Hindus: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (8 फरवरी) को कहा कि भारत में रहने वाला हर कोई हिंदू है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू शब्द धार्मिक पहचान के बजाय देश की सभ्यता की भावना को दिखाता है। 'संघ यात्रा के 100 साल' नाम के एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं। बल्कि एक विशेषण है जो भारत की सांस्कृतिक प्रकृति का वर्णन करता है। भागवत ने कहा कि भारत का वैश्विक नेतृत्व भाषणों से नहीं, बल्कि उदाहरण से तय होगा।
RSS प्रमुख ने देश में हिंदुओं की चार मुख्य कैटेगरी के बारे में बताया। मोहन भागवत ने हिंदुओं के लेकर कहा है कि हम विश्व गुरु बनेंगे। लेकिन भाषण से नहीं। हमें उदाहरण पेश करना होगा। भागवत ने कहा कि अगर आप भारत के हो तो, ये स्वभाव आप में है। RSS चीफ ने आगे कहा कि भारत में चार किस्म के हिंदू रहते हैं।
चार तरह के हिंदू कौन हैं?
मोहन भागवत ने कहा कि पहले समूह में वे लोग शामिल हैं जो गर्व से अपनी हिंदू पहचान को खुलकर बताते हैं। भागवत ने कहा, "पहला वो हैं जो कहते हैं, 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं।'" जबकि दूसरे समूह में वे लोग शामिल हैं जो हिंदू होने की बात तो मानते हैं। लेकिन इसमें कुछ भी खास नहीं देखते। उन्होंने कहा, "दूसरा जो कहते हैं, गर्व की क्या बात है?"
भागवत के अनुसार, तीसरी कैटेगरी में वे हिंदू शामिल हैं जो अपनी पहचान के बारे में सिर्फ निजी तौर पर बात करना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, "तीसरे... जो कहते हैं, धीरे बोलो हिंदू हैं।" इसके अलावा उन्होंने कहा कि चौथे समूह में वे लोग शामिल हैं जो या तो अपनी हिंदू पहचान भूल गए हैं। या उन्हें भुला दिया गया है।
अंग्रेजी भाषा पर भी बोले
मोहन भागवत ने कहा, "अब अंग्रेजी भाषा कभी भी संघ के पद्धति का हिस्सा नहीं बनेगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हमको भारतीय लोगों में काम करना है। हालांकि, जहां अंग्रेजी जरूरी है, वहां हम उसका उपयोग करते हैं। हमारा किसी भाषा से झगड़ा नहीं है। हम जो हैं वो हमको बने रहना है।"
RSS प्रमुख ने भारत के विभाजन को "हिंदू भाव" या हिंदू भावना के कमजोर होने से जोड़ा। उन्होंने कहा, "विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। हमने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं क्योंकि हम हिंदू हैं।" उन्होंने कहा कि मतभेदों और कभी-कभी होने वाले तनावों के बावजूद, भारत अपनी सभ्यता के मूल्यों के कारण एकजुट रहा है।
कौन बन सकता हैं RSS प्रमुख?
मोहन भागवत ने कहा, "संघ का सरसंघचालक कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता। कोई क्षत्रिय नहीं बन सकता..., कोई अन्य जाति का नहीं बन सकता, हां जो कोई भी बनेगा वह हिंदू ही होगा।"
भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदुत्व को अपनाने के लिए किसी को भी अपने धर्म, भाषा या सांस्कृतिक रीति-रिवाजों को छोड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "हिंदुत्व को अपनाने से आप कुछ भी नहीं खोते, न अपने धार्मिक रीति-रिवाज, न अपनी भाषा। हिंदुत्व सुरक्षा की गारंटी है।"
'हिंदू-मुस्लिम एकता का नारा भ्रामक'
RSS प्रमुख ने कहा, 'परिस्थिति ऐसी रहती है कि लोगों में अगर नया काम है तो भ्रम रहता है और भ्रम फैलाएं भी जाते हैं। संघ के बारे में भी ऐसा बहुत कुछ हुआ है। लेकिन भ्रम की सत्यता तब तक रहती है, जब तक सत्य सामने नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि भले ही लोगों के विश्वास, खाने की आदतें या भाषाएं अलग-अलग हों। लेकिन वे एक समाज और एक राष्ट्र के रूप में एक ही रहते हैं।
भागवत ने कहा, "हम इसे हिंदुत्व कहते हैं। आप इसे भारतीयता कह सकते हैं।" भागवत ने यह भी तर्क दिया कि हिंदू-मुस्लिम एकता का नारा भ्रामक है, क्योंकि एकता का मतलब ही अलगाव होता है। मोहन भागवत ने कहा कि RSS को सीधे संवाद से समझा जाना चाहिए, न कि प्रोपेगेंडा से।
'अगर RSS कहेगा तो पद छोड़ने के लिए तैयार हूं'
मोहन भागवत ने कहा कि अगर संघ उन्हें पद से हटने के लिए कहेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे। इस संगठन ने ही उनसे उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने के लिए कहा है। वह आरएसएस शताब्दी समरोह के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के साथ एक संवादात्मक सत्र के दौरान सवालों का जवाब दे रहे थे।
भागवत ने कहा, "आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "मैंने 75 वर्ष पूरे कर लिए और मैंने आरएसएस को इसकी सूचना भी दे दी थी। लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा। जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा लेकिन काम से रिटायरमेंट कभी नहीं होगी।" उन्होंने आगे कहा, "हमें समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है।"
भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को रिटायर करना पड़ा हो। उन्होंने कहा कि संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना।
भागवत ने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों को इस तरह से अंग्रेजी बोलनी आनी चाहिए कि अंग्रेजी भाषी लोग उसे सुनना चाहें। भागवत ने कहा, "हमें अंग्रेजी में महारत हासिल करनी चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएं।"