केरल से आगे की ओर बढ़ा मानसून पर El Nino का भी खतरा गहराया! Nuvama की ये रिपोर्ट आगे टफ टाइम की ओर कर रही इशारा

मैदान पर मानसून की इस तेजी के बावजूद वैश्विक क्लाइमेट इंडिकेटर्स अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। स्काईमेट के विश्लेषण के मुताबिक मई 2026 में अल नीनो से जुड़े सूचकांकों में भारी उछाल देखा गया है। Niño 3.4 इंडेक्स बढ़कर +0.5°C तक पहुंच गया है। Niño 1+2 इंडेक्स में भारी उछाल आया है और यह +1.7°C पर दर्ज किया गया है। ये आंकड़े साफ तौर पर प्रशांत महासागर में अल नीनो की मजबूत होती स्थिति की ओर इशारा करते हैं

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 6:51 PM
दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय देश के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में बेहद आक्रामक रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय देश के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में बेहद आक्रामक रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इस शुरुआती तेजी के बीच वैश्विक मौसम के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी चिंताजनक खबर सामने आई है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के ताजा विश्लेषणों ने आगाह किया है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) के बादल तेजी से गहराने लगे हैं। यह मौसमी गतिविधि आने वाले समय में भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा टफ टाइम यानी कि मुश्किल समय ला सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म नुवामा (Nuvama) की हालिया रिपोर्ट भी चेतावनी देती है कि वित्त वर्ष 2026-27 में देश के कंज्यूमर सेक्टर और ग्रामीण मांग के लिए अल नीनो एक बड़ा जोखिम बनकर उभरा है।

मानसून की मौजूदा स्थिति: केरल के बाद तेजी से बढ़ा आगे

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक मानसून ने इस साल 4 जून 2026 को केरल में दस्तक दी। यह अपनी सामान्य तारीख (1 जून) से महज तीन दिन की देरी पर था। केरल में एंट्री के बाद से मानसून ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। 8 जून तक मानसून अरब सागर के मध्य हिस्सों, पूरे महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर के बाकी राज्यों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। स्काईमेट ने भी इस शुरुआत को एक उम्मीद जगाने वाली शुरुआत बताया है, लेकिन असली चिंता इसके बाद की अवधि को लेकर है।


अल नीनो का खतरा

मैदान पर मानसून की इस तेजी के बावजूद वैश्विक क्लाइमेट इंडिकेटर्स अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। स्काईमेट के विश्लेषण के मुताबिक मई 2026 में अल नीनो से जुड़े सूचकांकों में भारी उछाल देखा गया है। Niño 3.4 इंडेक्स बढ़कर +0.5°C तक पहुंच गया है। Niño 1+2 इंडेक्स में भारी उछाल आया है और यह +1.7°C पर दर्ज किया गया है। ये आंकड़े साफ तौर पर प्रशांत महासागर में अल नीनो की मजबूत होती स्थिति की ओर इशारा करते हैं। मौसम मॉडल्स के अनुसार, साल 2026 के बचे हुए महीनों में अल नीनो के बने रहने की संभावना 95% से भी अधिक है। आमतौर पर अल नीनो भारतीय मानसून को कमजोर करता है। इससे बारिश में भारी असमानता आती है और मध्य व पश्चिमी भारत में सूखे जैसे हालात बनने का खतरा रहता है।

इसके साथ ही, हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) का वर्तमान में न्यूट्रल या नेगेटिव होना भी मानसून के लिए मददगार साबित नहीं हो रहा है। यही वजह है कि इस साल जून से सितंबर के दौरान कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का महज 90 से 94 फीसदी (सामान्य से कम) रहने का अनुमान लगाया गया है।

नुवामा की रिपोर्ट: भारतीय अर्थव्यवस्था और रूरल डिमांड पर पड़ेगा असर

एएनआई की एक रिपोर्ट में नुवामा के हवाले से बताया गया है कि भारतीय कंज्यूमर सेक्टर ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में ग्रामीण और शहरी मांग में शानदार सुधार दर्ज किया था। नीतिगत राहतों (GST 2.0 और इनकम टैक्स में छूट) की बदौलत लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ी थी और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), डाबर व कोलगेट जैसी कंपनियों के ग्रामीण और शहरी बाजारों का अंतर काफी कम हो गया था। अब यह पूरी रिकवरी दांव पर लग सकती है क्योंकि नुवामा ने अल नीनो को FY27 के लिए सबसे बड़ा रिस्क घोषित किया है।

लगातार दो साल तक अच्छे मानसून के बाद, साल 2026 में अगर मानसून सामान्य से नीचे रहता है तो ग्रामीण इलाकों में कृषि से होने वाली आमदनी को सीधा झटका लगेगा। नुवामा का अनुमान है कि इस साल कुल बारिश एलपीए (LPA) का करीब 90 प्रतिशत ही रह सकती है और मानसून का मुख्य हिस्सा देरी से यानी मुख्य रूप से अगस्त और सितंबर के महीने में केंद्रित हो सकता है। अगर मानसून कमजोर और असमान रहता है तो पिछले कुछ महीनों से ग्रामीण मांग में जो तेजी देखने को मिली है, उसकी रफ़्तार थम सकती है। इसके साथ ही महंगाई भी आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

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