Monsoon Alert: मानसून को लेकर आया डराने वाला पूर्वानुमान, Skymet ने दिया अब ये नया अपडेट

उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित इस प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक चालू मानसून सीजन में बारिश का आंकड़ा काफी निराशाजनक रहा है। जुलाई महीने के 8 से 10 फीसदी की बारिश की कमी के साथ खत्म होने की संभावना है। जून और जुलाई दोनों महीनों को मिलाकर कुल बारिश की कमी 20 फीसदी से अधिक रहने की उम्मीद है

अपडेटेड Jul 20, 2026 पर 4:45 PM
Monsoon Update: देश भर में मानसून की स्थिति को लेकर एक चिंताजनक और डराने वाली खबर सामने आई है।

Monsoon Update: देश भर में मानसून की स्थिति को लेकर एक चिंताजनक और डराने वाली खबर सामने आई है। पूर्वी और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में मौसम में आए मामूली सुधार को छोड़ दें तो देश भर में अब तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। आने वाले समय के लिए भी मौसम का रुख बेहतर होता नजर नहीं आ रहा है। हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV 18 की रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर सर्विसेज ने अगस्त महीने को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। स्काईमेट के अधिकारियों के मुताबिक अगस्त में मानसून के लंबा ब्रेक लेने के संकेत मिल रहे हैं। इससे देश में सूखे की स्थिति बनने का खतरा मंडरा रहा है।

जून और जुलाई में बारिश की क्या है स्थिति?

उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित इस प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक चालू मानसून सीजन में बारिश का आंकड़ा काफी निराशाजनक रहा है। जुलाई महीने के 8 से 10 फीसदी की बारिश की कमी के साथ खत्म होने की संभावना है। जून और जुलाई दोनों महीनों को मिलाकर कुल बारिश की कमी 20 फीसदी से अधिक रहने की उम्मीद है।


सूखा तो तय है, बस सवाल यह है कि कितना गंभीर होगा - Skymet

अगस्त महीने के आउटलुक पर चर्चा करते हुए स्काईमेट वेदर सर्विसेज के प्रेसिडेंट जीपी शर्मा ने कहा कि, 'मुझे थोड़ा डर लग रहा है। यह स्थिति अच्छी नहीं दिख रही है और यह थोड़ी डरावनी नजर आ रही है।' शर्मा ने शुरुआती मौसमी संकेतों के हवाले से बताया कि अगस्त में मानसूनी गतिविधियों में एक लंबा ब्रेक देखने को मिल सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि निश्चित रूप से सूखा पड़ने वाला है। अब सवाल सिर्फ यह है कि यह कितना गंभीर होगा।

कृषि और महंगाई पर भारी पड़ेगा मानसून का 'ब्रेक'

भारत में खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर है और दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) सिंचाई का मुख्य जरिया है। ऐसे में बारिश की भारी कमी के कारण गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। पर्याप्त बारिश न होने से फसलों की पैदावार घटने का खतरा है। फसल उत्पादन में कमी के कारण साल के उत्तरार्ध में महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ गया है। आपको बता दें कि देश में महंगाई जून के महीने में पहले ही 18 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है।

इन राज्यों और इलाकों पर मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा

स्काईमेट के मुताबिक बारिश की भारी कमी का सबसे ज्यादा असर और जोखिम नीचे दिए गए क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है-

  • उत्तर-पश्चिम भारत
  • गुजरात
  • मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से
  • महाराष्ट्र
  • उत्तरी मैदान

अगले हफ्ते आएगा स्काईमेट का नया सीजनल फोरकास्ट

स्काईमेट फिलहाल अपने सीजनल फोरकास्ट की समीक्षा कर रहा है। नए वेदर मॉडल डेटा का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद, एजेंसी अगले हफ्ते के भीतर अपना नया और अपडेटेड प्रोजेक्शन जारी कर सकती है।

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