मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार को बताया है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) 4 जून के आसपास केरल पहुंच सकता है। आमतौर पर मानसून 1 जून तक केरल आ जाता है, जिससे देश में चार महीने (जून से सितंबर) चलने वाले मानसून सीजन की शुरुआत होती है।
मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार को बताया है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) 4 जून के आसपास केरल पहुंच सकता है। आमतौर पर मानसून 1 जून तक केरल आ जाता है, जिससे देश में चार महीने (जून से सितंबर) चलने वाले मानसून सीजन की शुरुआत होती है।
मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल परिस्थितियां बिल्कुल अनुकूल हैं। 4 जून के आसपास मानसून अरब सागर के कुछ हिस्सों, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ सकता है। इसके साथ ही, बंगाल की खाड़ी के भी कई हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
पहले की भविष्यवाणी और देरी की वजह
इससे पहले मौसम विभाग ने कहा था कि मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा। लेकिन इसमें थोड़ी देरी हो गई, जिसके बाद विभाग ने 29 मई को साफ किया कि अब मानसून अगले हफ्ते (यानी जून के पहले हफ्ते) दस्तक देगा।
इस साल कैसी रहेगी बारिश?
मौसम विभाग ने पिछले हफ्ते अपने नए अनुमान में बताया है कि इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम (Below Normal) रहेगी। देश में इस साल औसतन यानी LPA का सिर्फ 90% बारिश होने की उम्मीद है।
LPA क्या है?
मौसम विभाग पिछले 30 से 50 सालों की बारिश का एक औसत निकालता है, जिसे लॉन्ग पीरियड एवरेज LPA कहते हैं। भारत में पिछले 50 सालों (1971 से 2020) का औसत रिकॉर्ड 87 सेंटीमीटर रहा है। अगर किसी साल इस औसत से 90% से कम बारिश होती है, तो मौसम विभाग उसे "कम या सूखे जैसी स्थिति" मानता है।
कम बारिश होने की वजह: एल-नीनो (El-Nino)
इस साल कम बारिश होने के पीछे 'एल-नीनो' का असर माना जा रहा है। एल-नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के गर्म होने की एक प्रक्रिया है, जिसकी वजह से भारत में अक्सर मानसून कमजोर पड़ जाता है और सूखा या कम बारिश देखने को मिलती है।
मौसम विभाग का कहना है कि जून के महीने में एल-नीनो का असर थोड़ा कमजोर रहेगा, लेकिन सितंबर आते-आते यह काफी मजबूत हो सकता है।
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