RBI on Monsoon: केरल में ही पहले क्यों आता है मानसून, RBI इस बार बारिश को लेकर क्यों है चिंतित?
RBI on Monsoon: एक तरफ जहां देश मानसून के स्वागत में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस बार की बारिश और मौसम के मिजाज को लेकर चिंतित है नजर आ रहा है। आखिर केरल में ही मानसून सबसे पहले क्यों आता है और केंद्रीय बैंक इस बार बारिश को लेकर क्यों अलर्ट मोड पर है? आइए इस विस्तृत न्यूज रिपोर्ट में इसके पीछे के पूरे भूगोल, अर्थशास्त्र और विज्ञान को समझते हैं
, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने सामान्य समय से तीन दिन की देरी से 4 जून को आधिकारिक तौर पर केरल पहुंच चुका है।
भीषण गर्मी के लंबे दौर के बाद आसमान में उमड़ते काले बादल, ठंडी हवाएं और सोंधी मिट्टी की खुशबू भारत के सबसे पसंदीदा मौसम मानसून के आगमन का संकेत दे रही हैं। देश के करोड़ों लोगों के लिए यह तपती गर्मी से राहत का जरिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के नक्शे पर वह कौन सा राज्य है जहां मानसून सबसे पहले दस्तक देता है? वह राज्य है केरल। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने सामान्य समय से तीन दिन की देरी से 4 जून को आधिकारिक तौर पर केरल पहुंच चुका है।
एक तरफ जहां देश मानसून के स्वागत में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस बार की बारिश और मौसम के मिजाज को लेकर चिंतित है नजर आ रहा है। आखिर केरल में ही मानसून सबसे पहले क्यों आता है और केंद्रीय बैंक इस बार बारिश को लेकर क्यों अलर्ट मोड पर है? आइए इस विस्तृत न्यूज रिपोर्ट में इसके पीछे के पूरे भूगोल, अर्थशास्त्र और विज्ञान को समझते हैं।
केरल ही क्यों है भारत में मानसून का प्रवेश द्वार?
आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून हर साल 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है और धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ते हुए मध्य-जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है। केरल को मानसून का गेटवे बनाने में यहां की भौगोलिक स्थिति, हवाओं के पैटर्न और जलवायु विज्ञान का एक दिलचस्प मिश्रण काम करता है।
हाई और लो प्रेशर का खेल
गर्मियों के दौरान उत्तर भारत के विशाल मैदानी इलाके अत्यधिक गर्म हो जाते हैं। इससे वहां एक कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है. इसके उलट दक्षिण में स्थित हिंद महासागर तुलनात्मक रूप से ठंडा रहता है। इससे वहां उच्च दबाव का क्षेत्र बनता है। विज्ञान के नियमों के मुताबिक हवा हमेशा उच्च दबाव से कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर चलती है। इसलिए, हिंद महासागर से नमी से भरी तेज हवाएं भारत की मुख्य भूमि की ओर दौड़ती हैं।
कोरिओलिस प्रभाव
जब ये नमी से भरी हवाएं भूमध्य रेखा को पार करती हैं तो पृथ्वी की घूर्णन गति की वजह से ये दाहिनी ओर मुड़ जाती हैं। इस प्राकृतिक घटना को 'कोरिओलिस प्रभाव' कहा जाता है। दाहिनी ओर मुड़ने के बाद ये हवाएं सीधे भारत के समुद्र तटीय इलाकों की ओर बढ़ती हैं।
केरल की भौगोलिक स्थिति और पश्चिमी घाट
केरल अरब सागर के तट पर सीधे स्थित है। इससे समुद्र की ओर से आने वाली ये मानसूनी हवाएं सबसे पहले केरल की जमीन से ही टकराती हैं। केरल में न सिर्फ मानसून पहले आता है, बल्कि वहां भारी बारिश भी होती है। इसका कारण है वहां मौजूद पश्चिमी घाट की गगनचुंबी पर्वत श्रृंखलाएं। जब नमी से भरी हवाएं इन पहाड़ों से टकराती हैं तो उन्हें ऊपर उठने पर मजबूर होना पड़ता है। ऊपर उठकर यह हवा ठंडी होती है और बादलों का रूप लेकर मूसलाधार बारिश करती है।
हर साल क्यों बदलती है मानसून के आने की तारीख?
वैसे तो केरल में मानसून की सामान्य तारीख 1 जून है, लेकिन वैश्विक जलवायु कारकों के कारण इसमें बदलाव होता रहता है। इस साल मानसून 3 दिन की देरी से आया है. आईएमडी के मुताबिक मानसून के इस व्यवहार के पीछे अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) जैसी वैश्विक समुद्री और वायुमंडलीय स्थितियां जिम्मेदार होती हैं।
इस बार मानसून को लेकर क्यों चिंतित है RBI?
शुक्रवार, 5 जून को पॉलिसी दरों की समीक्षा के दौरान रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने जहां अपनी मुख्य ब्याज दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है और अपना रुख न्यूट्रल बनाए रखा है, वहीं मानसून को लेकर कई गंभीर चिंताएं भी जाहिर की हैं।
1. कम मानसून और अल नीनो का खतरा
आरबीआई की एमपीसी (MPC) का मानना है कि इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने का अनुमान है. अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) के अनुसार मई-जुलाई 2026 के दौरान अल नीनो के उभरने की 82 प्रतिशत संभावना है, जो दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक 96 प्रतिशत संभावना के साथ बनी रह सकती है। अल नीनो की स्थिति भारतीय मानसून को कमजोर करती है। इस बात ने आरबीआई की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
2. ग्रामीण मांग और कृषि उत्पादन पर असर
आरबीआई ने साफ किया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी या बारिश के असमान वितरण का सीधा असर देश के कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ेगा। अगर ग्रामीण इलाकों में आय कम होती है, तो इसका असर देश की आर्थिक गतिविधियों पर दिखेगा।
3. महंगाई बढ़ने का बड़ा डर
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI Inflation) के अनुमान को पहले के 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई के मुताबिक वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया संकट के चलते इनपुट कॉस्ट बढ़ रही है। अगर मानसून कमजोर रहता है तो खाद्य आपूर्ति प्रभावित होगी। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। आरबीआई को डर है कि मानसूनी अनिश्चितता और अल नीनो के कारण वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही (Q3) में महंगाई दर उछलकर 5.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
राहत की बात क्या है?
तमाम चिंताओं के बीच आरबीआई ने यह भी कहा है कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक और जलाशयों में पानी का संतोषजनक स्तर कुछ हद तक राहत देने वाली बात है। इसके अलावा फसल विविधीकरण, वाटर हार्वेस्टिंग और कम समय में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा देने जैसी पहलों से मानसून के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। मानसून के मौसम में बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है, क्योंकि इस दौरान बाजारों से करेंसी बैंकों में वापस लौटती है।