दिल्ली का रैपिड रेल नेटवर्क अब मेरठ कॉरिडोर से आगे बढ़ाने की तैयारी है। न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा के लिए दो नए हाई-स्पीड रूट भी जल्द शुरू हो सकते हैं। इनमें दिल्ली-करनाल और दिल्ली-गुरुग्राम-बावल कॉरिडोर शामिल हैं। इन रूट के बनने से हरियाणा के प्रमुख इंडस्ट्रियल, कॉमर्सियल और एजुकेशनल इलाकों तक पहुंचने में 90 मिनट से भी कम समय लगने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) दोनों परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी लेने के लास्ट फेड में है। कुछ जगहों पर शुरुआती काम शुरू भी हो चुका है। टीम जमीन और सुविधाओं की जांच कर रही है और रूट के रास्ते में आने वाली पाइपलाइन और बिजली की लाइनों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है।
हरियाणा के इन इलाकों को होगा फायदा
दोनों कॉरिडोर शुरू होने के बाद नमो भारत नेटवर्क दिल्ली-मेरठ रूट से आगे हरियाणा के कई इलाकों तक पहुंच जाएगा। इससे दिल्ली की कनेक्टिविटी उत्तरी और दक्षिणी हरियाणा के प्रमुख क्षेत्रों से बेहतर होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-करनाल कॉरिडोर से दिल्ली को सोनीपत के कुंडली इलाके से जोड़ा जाएगा। कुंडली में कई बड़े शिक्षण संस्थान और रिहायशी कॉलोनियां हैं। इस रूट के शुरू होने से दिल्ली और सोनीपत-कुंडली के बीच रोजाना आने-जाने वाले छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और स्थानीय लोगों का सफर आसान हो सकता है।
90 मिनट में तय होगी 3 घंटे की दूरी!
रिपोर्ट के मुताबिक, यह कॉरिडोर पानीपत तक पहुंच को भी आसान बनाएगा। पानीपत अपनी कपड़ा इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है और यहां देश की बड़ी तेल रिफाइनरी भी है। इस रूट के शुरू होने से इंडस्ट्रियल इलाकों में काम करने वाले लोगों और कारोबारियों को तेज और बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। अभी ट्रैफिक के हिसाब से दिल्ली से करनाल सड़क के रास्ते पहुंचने में करीब 3 घंटे लग जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नमो भारत शुरू होने के बाद यह सफर करीब 90 मिनट में पूरा हो सकता है। इससे दिल्ली और करनाल के बीच रोजाना आने-जाने वाले लोगों का समय काफी बचेगा।
दूसरे कॉरिडोर का ये होगा रूट
दूसरा कॉरिडोर दिल्ली से गुरुग्राम होते हुए बावल तक जाएगा। इससे राजधानी की कनेक्टिविटी दक्षिणी हरियाणा के बड़े ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग इलाके से बेहतर होगी। अभी दिल्ली से बावल सड़क के रास्ते पहुंचने में करीब 3 घंटे लगते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉरिडोर शुरू होने के बाद यह सफर करीब 65 से 67 मिनट में पूरा हो सकता है। इससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों, कर्मचारियों और कारोबार के सिलसिले में सफर करने वालों का हर हफ्ते कई घंटे का समय बच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों परियोजनाओं को अभी केंद्र सरकार की कैबिनेट मंजूरी मिलना बाकी है, हालांकि जमीन पर तैयारी का काम चल रहा है। अगर तय समय के मुताबिक यात्रा पूरी होती है, तो इन दोनों कॉरिडोर से एनसीआर में सफर करना काफी आसान हो सकता है। सड़क से कई घंटे लगने वाले सफर को रैपिड रेल के जरिए करीब एक से डेढ़ घंटे में पूरा किया जा सकेगा।