Nana Patekar Dialogue: 'आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने...' से लेकर 'एक मच्छर...' तक, नाना पाटेकर के 10 दमदार डायलॉग
Nana Patekar Dies: नाना पाटेकर का नाम आते ही जेहन में उनकी दमदार आवाज, गुस्से से भरा अंदाज और डायलॉग बोलने की अनोखी शैली सामने आती है। उन्होंने अपने अभिनय से कई किरदारों को यादगार बनाया। लेकिन उनके कुछ दमदार डायलॉग ऐसे रहे हैं जो फिल्मों से निकलकर आम लोगों की बातचीत का हिस्सा बन गए
Nana Patekar Dies: नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है
Nana Patekar Dies: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार (8 अक्टूबर) तड़के दिल का दौरा पड़ने के बाद गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। पणजी के पास डोना पाउला स्थित अपने अपार्टमेंट में बेहोश पाए जाने के बाद 75 वर्षीय अभिनेता को एक निजी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल से जुड़े डॉ. शेखर सालकर ने यह जानकारी दी। सालकर ने बताया कि लगातार 45 मिनट तक 'सीपीआर' दिए जाने के बावजूद पाटेकर होश में नहीं आए। उन्होंने बताया कि 'मेडिको-लीगल' मामला दर्ज किया गया है। शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पाटेकर को सुबह करीब पांच बजकर 10 मिनट पर मृत घोषित किया गया।
नाना पाटेकर का नाम आते ही जेहन में उनकी दमदार आवाज, गुस्से से भरा अंदाज और डायलॉग बोलने की अनोखी शैली सामने आती है। उन्होंने अपने अभिनय से कई किरदारों को यादगार बनाया। लेकिन उनके कुछ संवाद ऐसे रहे जो फिल्मों से निकलकर आम लोगों की बातचीत का हिस्सा बन गए। आइए उनके 10 मशहूर डॉयलॉग के बारे में बताते हैं जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं...
1. 'आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने...'
मशहूर फिल्म 'क्रांतिवीर' में नाना पाटेकर के इस अंदाज ने दर्शकों को झकझोर दिया। इस संवाद में मौजूद दर्द, गुस्सा और बेबसी उनके अभिनय की ताकत को दिखाता है।
2. 'ये मुसलमान का खून है, ये हिंदू का खून है... बता इसमें मुसलमान का खून कौन सा है और हिंदू का कौन सा है?'
'क्रांतिवीर' का यह डायलॉग
धर्म के नाम पर होने वाली नफरत पर सीधा सवाल खड़ा करता है। नाना की आवाज और अदायगी ने इसे बेहद प्रभावशाली बना दिया।
3. 'साला ये दुख काहे खत्म नहीं होता बे?'
फिल्म 'अब तक छप्पन' में नाना के किरदार के भीतर का तनाव और थकान इस छोटे से संवाद में झलकती है। उनकी डिलीवरी ने इसे यादगार बना दिया।
4. 'सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान...'
'यशवंत' में व्यवस्था और समाज पर तंज कसता यह संवाद नाना की शैली का शानदार उदाहरण है। नाना पाटेकर ने फिल्म में पुलिस अधिकारी यशवंत लोखंडे का किरदार निभाया था।
5. 'एक मच्छर... आदमी को हिजड़ा बना देता है'
फिल्म 'यशवंत' का यह संवाद नाना पाटेकर के बेहद आक्रामक और प्रभावशाली अंदाज को दिखाता है। संवाद के साथ उनका एक्सप्रेशन इसे और ताकतवर बनाता है।
6. 'मराठा मरता है या मारता है...'
यह डायलॉग 1993 की हिंदी फिल्म 'तिरंगा' का है। इस फिल्म में यह प्रसिद्ध डायलॉग नाना पाटेकर (इंस्पेक्टर शिवाजीराव वागले के किरदार में) ने बोला था। नाना की संवाद अदायगी में मौजूद ठहराव और आत्मविश्वास इस तरह के संवादों को अलग प्रभाव देता है।
7. 'गलती तो सब करते हैं... माफ करने वाला बड़ा होता है'
नाना के किरदारों में गुस्से के साथ-साथ भावनात्मक गहराई भी देखने को मिलती रही है। ऐसे संवाद उनके अभिनय के दूसरे पहलू को सामने लाते हैं।
8. 'ऊपर वाला भी ऊपर से देखता होगा तो उसे शर्म आती होगी... मैंने सबसे खूबसूरत चीज बनाई थी, इंसान... नीचे देखा तो सब कीड़े बन गए।'
यह मशहूर डॉयलॉग 'क्रांतिवीर' का है।
9. 'धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं'
नाना का यह मशहर संवाद फिल्म 'परिंदा' का है।
10. 'हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है'
यह डायलॉग फिल्म 'अब तक छप्पन' का है।
क्यों खास थी नाना पाटेकर की डायलॉग डिलीवरी?
नाना पाटेकर के संवादों की खासियत यही रही कि वे सिर्फ शब्द नहीं रहते थे। उनकी आवाज, चेहरे के भाव और संवाद बोलने का अंदाज मिलकर उन्हें यादगार बना देता था। पाटेकर की सबसे बड़ी ताकत उनकी आवाज और एक्सप्रेशन थे। वह संवाद बोलते वक्त शब्दों पर ही नहीं, बल्कि उनके बीच के ठहराव और खामोशी पर भी उतना ही जोर देते थे। यही वजह है कि उनका एक साधारण संवाद भी पर्दे पर आते ही अलग असर पैदा करता था। गुस्से वाले दृश्य हों या भावुक सीन, नाना पाटेकर ने अपनी आवाज और अदाकारी से किरदारों में जान डाल दी। यही उनकी संवाद अदायगी को हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान देता है।