Nandan Nilekani: IIT बॉम्बे से पढ़ाई और फिर रखी इंफोसिस की नींव! जानिए कितने पढ़े-लिखे हैं नंदन नीलेकणि

Nandan Nilekani Educational Qualification: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक पर देश भर में हुए छात्रों के आंदोलन के बाद पीएम मोदी ने लीक-प्रूफ परीक्षाओं के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है। जिसकी कमान नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है। वे न केवल कॉर्पोरेट और टेक जगत का बड़ा चेहरा हैं, बल्कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र भी रहे हैं

अपडेटेड Jul 27, 2026 पर 2:15 PM
IIT बॉम्बे से डिग्री लेने के बाद उन्होंने मुंबई स्थित 'पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स' से अपने करियर की शुरुआत की

Nandan Nilekani Educational Qualification: देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का कायाकल्प करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पीएम मोदी ने देश में आयोजित होने वाली की परीक्षाओं को लीक-प्रूफ बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसकी कमान दिग्गज टेक उद्यमी और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है।

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद गठित इस कमेटी के प्रमुख नंदन नीलेकणि न केवल कॉर्पोरेट और टेक जगत का बड़ा चेहरा हैं, बल्कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र भी हैं। आइए जानते हैं उनकी शैक्षणिक योग्यता और करियर की पूरी जर्नी।

नंदन नीलेकणि की शैक्षणिक योग्यता


नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली पढ़ाई बेंगलुरु के प्रसिद्ध बिशप कॉटन बॉयज स्कूल और धारवाड़ के सेंट जोसेफ हाई स्कूल से पूरी की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज IIT बॉम्बे में प्रवेश लिया। साल 1978 में उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की।

पटनी कंप्यूटर्स से 'इंफोसिस' और 'आधार' तक का सफर

IIT बॉम्बे से डिग्री लेने के बाद उन्होंने मुंबई स्थित 'पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स' से अपने करियर की शुरुआत की। यहीं उनकी मुलाकात एन. आर. नारायण मूर्ति से हुई। 1981 में नीलेकणि ने नारायण मूर्ति और 5 अन्य साथियों के साथ मिलकर Infosys की शुरुआत की। वे 2002 से 2007 तक कंपनी के सीईओ और प्रबंध निदेशक रहे। वर्तमान में वे इंफोसिस के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं।

डिजिटल इंडिया और 'आधार' के शिल्पी

वे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के संस्थापक अध्यक्ष रहे, जहां उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक पहचान प्रोजेक्ट 'आधार' का ढांचा तैयार किया और उसे सफलतापूर्वक लागू कराया।

उन्हें व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2006 में भारत सरकार द्वारा 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया। वे प्रसिद्ध पुस्तकों 'Imagining India' और 'Rebooting India' के लेखक भी हैं।

ब मिली NTA सुधार टास्क फोर्स की जिम्मेदारी

नीट पेपर लीक विवाद के बाद गठित इस उच्च स्तरीय समिति को NTA के कामकाज में सुधार के लिए ये प्रमुख जिम्मेदारियां दी गई हैं:

तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल: परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ब्लॉकचेन और एडवांस्ड साइबर सुरक्षा तकनीकों को एकीकृत करना।

पारदर्शिता और सुरक्षा: प्रश्नपत्र निर्माण, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और डेटा सुरक्षा को पूरी तरह लीक-प्रूफ बनाना।

NTA का पुनर्गठन: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के प्रशासनिक ढांचे, साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और गवर्नेंस में सुधार की सिफारिशें देना।

छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी सरकार, फिर बना टास्क फोर्स 

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देश के युवाओं का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों के भारी आक्रोश और चौतरफा दबाव के आगे आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना पड़ा। सरकार ने न सिर्फ प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें मानीं, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाने के लिए उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन भी कर दिया। इसी कमेटी की कमान नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है।

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