Nitin Gadkari: आरोपों पर बरसे नितिन गडकरी! 'एथेनॉल की कंपनियों में सिर्फ 0.5% है बेटों की हिस्सेदारी, मुझे बदनाम करने की हो रही साजिश'
Nitin Gadkari On Ethanol Conflict: एक इंटरव्यू में गडकरी ने स्पष्ट किया कि उनके बेटों द्वारा संचालित चीनी और एथेनॉल कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी बेहद मामूली है और उनका इन कंपनियों के कामकाज, निर्णय लेने की प्रक्रिया या खरीद से कोई लेना-देना नहीं है।
नितिन गडकरी ने अपनी पारिवारिक कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी को लेकर अहम आंकड़े साझा किए
Nitin Gadkari on Ethanol Blending: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से व्यक्तिगत या वित्तीय लाभ उठाने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे इस अभियान को पूरी तरह 'राजनीति से प्रेरित' और भ्रामक बताया है।
एक हालिया इंटरव्यू में गडकरी ने स्पष्ट किया कि उनके बेटों द्वारा संचालित चीनी और एथेनॉल कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी बेहद मामूली है और उनका इन कंपनियों के कामकाज, निर्णय लेने की प्रक्रिया या खरीद से कोई लेना-देना नहीं है।
बेटों की कंपनियों पर गडकरी का बड़ा बयान
नितिन गडकरी ने अपनी पारिवारिक कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी को लेकर अहम आंकड़े साझा किए:
केवल 0.5% हिस्सेदारी: गडकरी ने बताया, 'एथेनॉल हमारे कुल बिजनेस का सिर्फ 10% हिस्सा है। देश के कुल एथेनॉल कारोबार में मेरे बेटों द्वारा चलाई जा रही फैक्ट्रियों की हिस्सेदारी 0.5% से भी कम है।'
₹1,600 करोड़ का कर्ज: केंद्रीय मंत्री ने खुलासा किया कि इन कंपनियों पर करीब ₹1,600 करोड़ का कर्ज है। ऐसे में एथेनॉल कार्यक्रम से किसी भी तरह के व्यक्तिगत फायदे के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
कोई नया कार्यक्रम नहीं: उन्होंने याद दिलाया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए (NDA) सरकार में हुई थी और इसे यूपीए (UPA) सरकार के दौरान भी आगे बढ़ाया गया था, जिसे तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने संसद में पूरा समर्थन दिया था।
वैकल्पिक ईंधन और प्रदूषण मुक्त भारत का मिशन
गडकरी ने साफ किया कि एथेनॉल के लिए उनका समर्थन किसी निजी फायदे के लिए नहीं, बल्कि देशहित में है:
कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना: एथेनॉल और अन्य वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने का उद्देश्य देश के भारी-भरकम कच्चे तेल आयात बिल में कटौती करना और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकना है।
विविध स्रोत: उन्होंने कहा कि वह केवल गन्ने से बने एथेनॉल के ही पैरोकार नहीं हैं, बल्कि मक्का, चावल, पराली और बांस से बने एथेनॉल के साथ-साथ मेथनॉल, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए भी लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
E20 ईंधन और इंजन खराब होने के दावों का सच
पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20 Fuel) से इंजन खराब होने की सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर गडकरी ने कड़ा रुख अपनाया, 'उन्होंने कहा कि इन दावों का कोई वैज्ञानिक आधार या सबूत नहीं है। मारुति सुजुकी जैसी बड़ी वाहन निर्माता कंपनी ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि इस ईंधन से इंजनों को कोई नुकसान नहीं होता। सभी E10 कंप्लायंट गाड़ियां आसानी से E20 पर चल सकती हैं।
गडकरी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में लोगों से अपील की थी कि अगर किसी को इस ईंधन से समस्या आ रही है तो वे उनके मंत्रालय को लिखें, लेकिन अभी तक एक भी शिकायत नहीं मिली है।
माइलेज पर असर और शुद्ध पेट्रोल की कीमत
केंद्रीय मंत्री ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने माना कि पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल का कैलोरी मान कम होता है, जिससे हाईवे पर तेज गति से गाड़ी चलाते समय माइलेज में थोड़ी बहुत कमी आ सकती है। हालांकि, रोजमर्रा की शहरी ड्राइविंग पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ता।
भारत ने देशव्यापी स्तर पर 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है और E20 पेट्रोल अब पूरे देश में उपलब्ध है। यदि कोई ग्राहक बिना मिलावट वाला शुद्ध पेट्रोल खरीदना चाहता है, तो वह उसे ऊंचे दामों पर खरीद सकता है।
वैश्विक उदाहरणों से किया बचाव
गडकरी ने भारत की बायोफ्यूल रणनीति का बचाव करते हुए ब्राजील, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों का उदाहरण दिया, जिन्होंने बड़े पैमाने पर एथेनॉल और बायोफ्यूल्स का इस्तेमाल कर अपने पर्यावरण को सुधारा है और किसानों को समृद्ध बनाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी नीतियों का उद्देश्य देश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और प्रदूषण मुक्त भारत का निर्माण करना है।