Noida : स्कूलों में स्क्रीन टाइम की लिमिट तय, प्राइमरी बच्चों के लिए 30 मिनट और अपर प्राइमरी के लिए 60 मिनट की सीमा तय

गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन ने गुरुवार को बताया कि यह नियम जिले के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों पर लागू होगा। नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन के मुताबिक, अभिभावक संघों ने शिकायत की थी कि स्कूलों में पढ़ाई के लिए लगातार स्मार्ट और डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है

अपडेटेड Aug 14, 2026 पर 3:27 PM
आज के आधुनिक समय में स्कूलों में छात्र, ब्लैक बोर्ड की बजाय सीधे स्क्रीन पर देखकर चीजों को समझ रहे हैं।

आज के आधुनिक समय में स्कूलों में छात्र, ब्लैक बोर्ड की बजाय सीधे स्क्रीन पर देखकर चीजों को समझ रहे हैं। हालांकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इस पर लिमिट तय कर दी गई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्कूलों को बच्चों के रोजाना स्क्रीन टाइम को सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों के लिए रोजाना अधिकतम 30 मिनट और अपर प्राइमरी कक्षाओं के छात्रों के लिए 60 मिनट तक स्क्रीन के इस्तेमाल की सीमा तय की है। यह फैसला अभिभावकों की शिकायतों के बाद लिया गया है। शिकायतों में कहा गया था कि कई स्कूलों में बच्चे स्मार्ट और डिजिटल बोर्ड के जरिए पढ़ाई करते हुए रोजाना चार से पांच घंटे तक स्क्रीन देखते हैं।

प्रशासन ने दिए ये आदेश

गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन ने गुरुवार को बताया कि यह नियम जिले के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों पर लागू होगा। नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन के मुताबिक, अभिभावक संघों ने शिकायत की थी कि स्कूलों में पढ़ाई के लिए लगातार स्मार्ट और डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन बोर्ड पर किताबें दिखाने, क्लासवर्क कराने, सवाल-जवाब और होमवर्क जैसे काम भी कराए जा रहे थे।


अभिभावकों की मिल रही थी शिकायतें

जानकारी के मुताबिक, अभिभावकों की ओर से स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड के लगातार इस्तेमाल को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। उनका कहना था कि बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। कई स्कूलों में पढ़ाई के दौरान चार से पांच घंटे तक लगातार स्मार्ट बोर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। किताबें दिखाने, क्लासवर्क कराने, सवाल-जवाब करने और होमवर्क देने तक के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल हो रहा था। अभिभावकों की इन चिंताओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है।

जिला अधिकारी ने मजिस्ट्रेट पर नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह वह अपने आवंटित विद्यालयों में यह सुनिश्चित करेंगे कि प्राथमिक कक्षाओं में स्क्रीन टाइमिंग अधिकतम 30 मिनट और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में अधिकतम 60 मिनट से ज्यादा ना हो।

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