वाह, सास हो तो ऐसी! पहली मकर संक्रांति पर सास ने दामाद की शान में परोस डाले 158 व्यंजन

हमारे देश में एक दामाद की अपने ससुराल में क्या जगह होती है, ये हर कोई जानता है। दामाद शादी के बाद अगर पहली बार कोई त्योहार मनाने ससुराल आ रहा तो, आवभगत की बात ही कुछ और होती है। आंध्र प्रदेश में भी मकर संक्रांति पर ऐसा ही कुछ हुआ, जब सास ने दामाद के लिए 158 डिशेज परोस डाली

अपडेटेड Jan 16, 2026 पर 8:04 PM
Story continues below Advertisement
आंध्र प्रदेश के तेनाली के एक परिवार ने संक्रांति के जश्न को अपने दामाद के लिए यादगार बना दिया।

हमारे देश में एक दामाद का अपनी ससुराल में बहुत सम्मान किया जाता है। ये परंपरा पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण, हर जगह एक जैसी है। इसी परंपरा की एक झलक हाल ही में मकर संक्रांति के त्योहार पर आंध्र प्रदेश में देखने को मिली। यहां शादी के बाद पहली बार त्योहार मनाने के लिए पधार रहे बेटी और दामाद के स्वागत में सासु मां इतनी गदगद हो गईं कि एक-दो नहीं पूरी 158 डिशेज अपने दामाद की शान में परोस दीं। इस पल को कैमरे में कैद कर ऑनलाइन एक्स पर भी पोस्ट किया गया, जो वायरल हो गया।

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के तेनाली के एक परिवार ने इस साल संक्रांति के जश्न को अपने दामाद के लिए यादगार बना दिया। ससुराल में शादी के बाद मकर संक्रांति के रूप में अपना पहला त्योहार मनाने पधारे दामाद की शान में 158 पकवान बनाकर परोसे गए। वंदनापु मुरलीकृष्ण और उनकी पत्नी ने गोदावरी जिले के राजमुंदरी के रहने वाले अपने दामाद श्रीदत्ता और अपनी बेटी मौनिका के लिए शानदार दावत रखी। पिछले साल शादी के बाद यह इस जोड़े की पहली संक्रांति थी, जिसने इसे और भी खास बना दिया।

आंध्र प्रदेश में दामाद को पारंपरिक रूप से राजाओं की तरह माना जाता है। परिवार उन्हें खास महसूस कराने और उनके लिए अपना प्यार और सम्मान जताने में कोई कसर नहीं छोड़ते। तेनाली के परिवार ने 158 पकवान परोस कर इस परंपरा को निभाने में एक कदम और आगे बढ़ाया। उन्होंने इस शानदार दावत में मिठाइयां, नाश्ते और पारंपरिक चीजें पेश कीं, जिसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के व्यंजन थे। इस दावत में पारंपरिक आंध्र व्यंजनों की एक पूरी रेंज थी - मुरुकुलु, चिक्कालु और गारेलु जैसे कुरकुरे नमकीन नाश्ते, गुड़ से बनी मीठी चीजें, जैसे अरिसलु, बोब्बट्लु, सुन्नुंडुलु और कज्जिकायलू, साथ ही शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजनों का मिश्रण, चावल की किस्में, करी और भी बहुत कुछ।

इतनी वैरायटी और मेहनत देखकर हर कोई हैरान रह गया, कई लोगों ने इसे "अदिरेपोयेला" (दिमाग चकरा देने वाला) खाना बताया। यह सत्कार की गोदावरी परंपराओं की भव्यता से पूरी तरह मेल खाता था। आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में, खासकर गोदावरी जिले में, संक्रांति सिर्फ फसल का त्योहार नहीं है। यह पारिवारिक प्यार, सम्मान और मेहमाननवाजी का दिल से किया गया इजहार है।


आंध्र प्रदेश में मकर संक्रांति

आंध्र प्रदेश में मकर संक्रांति को पेद्दा पंडुगा के नाम से भी जाना जाता है। यह चार दिनों तक मनाया जाने वाला एक भव्य फसल उत्सव है। यह त्योहार सूर्य भगवान का सम्मान करने और रबी की फसल के लिए आभार व्यक्त करने का समय है।

चार दिनों के इस उत्सव में शामिल हैं:

भोगी (पहला दिन): परिवार नवीनीकरण के प्रतीक के रूप में पुरानी चीजों को भोगी मंटालू (अलाव) में जलाते हैं।

पेड्डा पंडुगा (दूसरा दिन): मुख्य दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। महिलाएं अपने आंगन को सुंदर मुग्गू (रंगोली) पैटर्न और गोब्बेम्मा (फूलों से सजे गोबर के गोले) से सजाती हैं।

कनुमा (तीसरा दिन): तीसरा दिन मवेशियों को समर्पित है। खेती में उनकी भूमिका के लिए जानवरों को नहलाया जाता है, सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है।

मुक्कनुमा (चौथा दिन): चौथा दिन सामुदायिक दावत का होता है, जिसमें अक्सर पिछले शाकाहारी दिनों के बाद मांसाहारी व्यंजन शामिल होते हैं।

Maharashtra Civic Poll Results: अकेले लड़ी लेकिन दम से लड़ी, 227 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही कांग्रेस

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।