ONGC Strategic Petroleum Reserve: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है। समुद्री रास्तों पर ब्लॉकबेड के खतरों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बेहद बड़ा फैसला लिया है। देश की सबसे बड़ी तेल और गैस खोजकर्ता कंपनी ओएनजीसी (ONGC) दक्षिण भारत के मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता का एक नया 'नेशनल स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) यानी रणनीतिक कच्चा तेल भंडार बनाएगी।
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी दी है। आइए समझते हैं कि स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व क्या होता है और संकट के समय यह भारत के लिए कितना जरूरी साबित होगा।
क्यों पड़ी नए ऑयल रिजर्व की जरूरत?
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश होने के कारण भारत अपनी जरूरतों का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। हाल ही में ईरान पर इजरायल-अमेरिकी हमलों के बाद जब 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के समुद्री रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया, तो भारत को कच्चे तेल की सप्लाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
दुनिया की कुल ऊर्जा सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज के सकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध या किसी भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय मुसीबत के समय जब विदेशों से तेल आना बंद हो जाए, तब देश के कामकाज को बिना रुकावट चलाने के लिए इन 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' में जमा तेल का इस्तेमाल किया जाता है।
कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सरकार से मांगी जाएगी मंजूरी
ONGC ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि वह 'राष्ट्रहित' में बनाए जाने वाले इस विशालकाय स्टोरेज का एक हिस्सा व्यावसायिक यानी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए उपयोग करने की खातिर केंद्र सरकार से अनुमति मांगेगी।
मौजूदा समय में केंद्र सरकार पहले से ही दक्षिण भारत के तीन स्थानों मंगलुरु, पादुर और विशाखापट्टनम में बने रणनीतिक भंडारों के एक हिस्से को व्यावसायिक उपयोग के लिए मंजूरी देती है। इन तीनों जगहों पर कुल मिलाकर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल स्टोर करने की क्षमता है, जिसका प्रबंधन सरकारी कंपनी 'इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड' (ISPRL) करती है।
UAE और जापान के साथ बढ़ रहा है सहयोग
भारत एमर्जेंसी स्टॉक को मजबूत करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात और जापान जैसे मित्र देशों के साथ लगातार अपनी एनर्जी पार्टनरशिप बढ़ा रहा है। मंगलुरु में ओएनजीसी की सहायक कंपनी 'मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड' (MRPL) 3 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली रिफाइनरी चलाती है। यहां पहले से मौजूद 1.5 मिलियन टन के स्टोरेज का आधा हिस्सा MRPL और बाकी आधा हिस्सा यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने लीज पर ले रखा है।
इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे के समय, ADNOC ने भारत में अपने कच्चे तेल के स्टोरेज को बढ़ाकर 3 करोड़ बैरल करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही यूएई भारत के रणनीतिक रिजर्व के हिस्से के रूप में फुजैराह में भी तेल भंडारण की संभावनाएं तलाश रहा है।
ओडिशा और पादुर में भी बनेंगे रिजर्व
मंगलुरु में ओएनजीसी के इस नए प्रोजेक्ट के अलावा, भारत सरकार देश के अन्य हिस्सों में भी तेल भंडारण क्षमता को कई गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है:
ओडिशा (पूर्वी भारत): चंडीखोल में 4 मिलियन मीट्रिक टन की क्षमता वाला एक नया रणनीतिक तेल भंडार बनाया जाएगा।
पादुर (दक्षिण भारत): कर्नाटक के पादुर में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली एक नई अतिरिक्त फैसिलिटी तैयार की जाएगी।
कुल मिलाकर ओएनजीसी का यह कदम वैश्विक तनाव के बीच भारत की तेल आत्मनिर्भरता और संकट प्रबंधन क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगा, ताकि ग्लोबल मार्केट में मंदी या युद्ध होने पर भी देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो।