Brij Bhushan Sharan Singh: वर्ल्ड चैंपियनशिप की पदक विजेता विनेश फोगाट ने सोमवार (3 अगस्त) को कहा कि भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने वाली महिला पहलवान दिल्ली की एक अदालत द्वारा उन्हें बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करेंगी। दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में सिंह और उनके साथ सह आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया।
विनेश ने X पर पोस्ट किया, "शुरू से ही पूरा प्रशासन, सरकार और व्यवस्था बृजभूषण को बचाने में लगी हुई है। हमें बहुत दुख है कि अदालत ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में बृजभूषण शरण सिंह को दोषी नहीं पाया।" उन्होंने आगे कहा, "महिला पहलवानों ने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ अपील करने का निर्देश दिया है। अपील जल्द से जल्द दायर की जाएगी। हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है और पहलवान अपना संघर्ष जारी रखेंगे।"
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने BJP के पूर्व सांसद सिंह और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव तोमर को इस मामले में बरी किया। विनेश ने पहलवान साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के साथ मिलकर अप्रैल-मई 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर सिंह के खिलाफ 36 दिनों तक धरना प्रदर्शन में भाग लिया था।
बजरंग पुनिया का भी आया पोस्ट
बजरंग पूनिया ने भी अपने एक्स हैंडल पर यही बयान पोस्ट किया। विनेश ने आरोप लगाया कि बृजभूषण ने कई लड़कियों को धमकाकर उनके नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा, "हमें सड़कों पर उतरकर सत्तारूढ़ पार्टी के एक शक्तिशाली नेता के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए बहुत साहस जुटाना पड़ा। बृजभूषण ने अपने प्रभाव और राजनीतिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए कई लड़कियों को धमकाकर उनके नाम वापस लेने पर मजबूर किया। लेकिन कई महिला पहलवानों ने दृढ़ रवैया अपनाया और बृजभूषण के खिलाफ अदालत में लड़ाई जारी रखी।"
दिल्ली पुलिस ने छह पहलवानों की शिकायत पर 15 जून, 2023 को सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस ने छह बार के सांसद सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न), 354डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप पत्र दायर किया था।
नाबालिग ने भी की थी शिकायत
पहलवानों में से एक नाबालिग ने बाद में अपनी शिकायत वापस ले ली थी। दिल्ली की एक अदालत ने पिछले साल मई में दिल्ली पुलिस की रद्द करने की रिपोर्ट को स्वीकार किया था, जिससे नाबालिग द्वारा दायर पॉस्को (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) मामला बंद हो गया। मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने दो जुलाई को तीन अगस्त के लिए फैसला सुरक्षित रखा था।
सिंह ने अदालत के बाहर पत्रकारों से कहा कि अदालत ने उन्हें और तोमर को ‘सम्मानपूर्वक’ बरी कर दिया है। उन्होंने कहा, "मैं पहले से ही कहता रहा हूं कि अगर मेरे खिलाफ कोई भी आरोप साबित हुआ तो मैं फांसी लगा लूंगा। अदालत ने अब मुझे सम्मानपूर्वक बरी कर दिया है। मैं खुश हूं और अपने वकीलों का आभारी हूं।"