Pahalgam Terror Attack: पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। इससे पहले उसने इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। हमले के बाद से घाटी में कश्मीरी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद के लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने पहलगाम में पर्यटकों पर हुए भयानक हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए।
केंद्र सरकार ने TRF पर बैन लगा दिया है। यह संगठन ऑनलाइन माध्यम से कश्मीरी युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने, आतंकवादियों की भर्ती करने, आतंकवादियों की घुसपैठ कराने और पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी करने में शामिल रहा है। गृह मंत्रालय ने आतंकवाद को बढ़ावा देने, आतंकवादियों की भर्ती करने, घुसपैठ में मदद करने और 2023 में पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में हथियारों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी करने के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत टीआरएफ को "आतंकवादी संगठन" घोषित किया है।
आतंकवादी संगठन ने एक बेशर्म बयान में कहा, "टीआरएफ ने पहलगाम घटना में अपनी किसी भी संलिप्तता से साफ इनकार किया है। इस कृत्य के लिए टीआरएफ को जिम्मेदार ठहराना गलत और जल्दबाजी में किया गया काम है।" आतंकी संगठन ने आगे कहा कि पहलगाम हमले के तुरंत बाद उनके एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से एक "अनधिकृत" मैसेज पोस्ट किया गया था, जिसमें जिम्मेदारी ली गई थी।
टीआरएफ ने एक ऑडियो क्लिप भी जारी की, जिसमें अपने इनकार को दोहराया और उसी कहानी को आगे बढ़ाया। टीआरएफ द्वारा पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान और उसके द्वारा समर्थित आतंकी समूहों के प्रति अपना गुस्सा व्यक्त किया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी आलोचना की है। साथ ही आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के दोषियों एवं उनके मददगारों को जवाबदेह ठहराने तथा उन्हें न्याय के कटघरे में लाने की जरूरत पर बल दिया। यूएनएससी ने शुक्रवार को मीडिया में एक बयान जारी कर इस बात को दोहराया कि हर तरह का आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।
बयान में कहा गया, "सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है जिसमें कम से कम 26 लोग मारे गए और कई अन्य लोग घायल हो गए।" मीडिया में यह बयान यूएनएससी अध्यक्ष द्वारा सभी 15 सदस्य देशों की ओर से जारी किया गया है। पाकिस्तान वर्तमान में यूएनएससी में एक अस्थायी सदस्य है।
यूएनएससी के सदस्यों ने पीड़ितों के परिवारों और भारत एवं नेपाल की सरकारों के प्रति गहरी सहानुभूति और संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। सदस्यों ने आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के दोषियों और उनके मददगारों को जवाबदेह ठहराने तथा उन्हें न्याय के कटघरे में लाने की जरूरत पर भी बल दिया।
यूएनएससी ने कहा कि इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है। उसने सभी देशों से आग्रह किया कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून एवं सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों के तहत अपने दायित्वों के अनुसार इस संबंध में सभी सक्षम अधिकारियों के साथ सक्रिय सहयोग करें। पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर पर्यटक थे।