Anti-Paper Leak Bill: सरकार पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े अपराधों के खिलाफ सख्त प्रावधान वाले 'एंटी-पेपर लीक बिल' को सोमवार (27 जुलाई) को लोकसभा में पेश करने की तैयारी में है। 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन से संबंधित विधेयक को सोमवार की सदन की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
सदस्यों को दिए विधेयक की कॉपी के अनुसार, परीक्षाओं में पेपर लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। विधेयक में संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी। विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है। ये अदालतें आरोपपत्र दाखिल किए जाने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी।
धर्मेंद्र प्रधान को देना पड़ा इस्तीफा
नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन और फिर शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार यह विधेयक पेश करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एग्जाम सिस्टम में सुधार के लिए एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति बनाने की घोषणा भी की है।
PM मोदी ने नंदन नीलेकणि को दी बड़ी जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सुधार के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया। इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि करेंगे। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो मैसेज में पीएम मोदी ने कहा कि सरकार टास्क फोर्स के सुझावों को लागू करेगी ताकि परीक्षा सिस्टम की विश्वसनीयता बनी रहे। साथ ही टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करके पारदर्शिता लाई जा सके।
प्रधानमंत्री का यह ऐलान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले आंदोलन के खत्म होने के एक दिन बाद आया। यह विरोध प्रदर्शन शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ था। इस टास्क फोर्स में अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स का एक ग्रुप शामिल होगा।
नीलेकणि के अलावा, टास्क फोर्स के अन्य सदस्यों में पूर्व ISRO डायरेक्टर एस. सोमनाथ, पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) डायरेक्टर तपन डेका, IIT चेन्नई के डायरेक्टर वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा शामिल हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सरकार ने नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई-लेवल टास्क फोर्स का गठन किया है। इसका मकसद टेक्नोलॉजी-बेस्ड सुधारों को आगे बढ़ाना है ताकि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को ज्यादा पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जा सके।
इससे पहले रविवार शाम को जोशी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। संसद में प्रस्तावित उस बिल को देखते हुए यह बैठक अहम मानी जा रही है, जिसका मकसद पेपर लीक होने की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाना है। नीलेकणि ने जमीनी स्तर पर 'आधार' प्रोजेक्ट को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। साथ ही भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम को शुरू करने में भी उनकी अहम भूमिका थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार एक दोष-मुक्त और पूरी तरह से सुरक्षित परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए टास्क फोर्स की सिफारिशों पर अमल करेगी। उन्होंने कहा कि यह टास्क फोर्स NTA परीक्षाओं को बेहतर बनाने और परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार लाने में मदद करेगी। पीएम मोदी ने कहा कि भारत सरकार छात्रों के भविष्य के लिए लगातार कई कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही टास्क फोर्स का गठन किया गया है।