Get App

80 साल बाद भी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां जापान में क्यों हैं? सुप्रीम कोर्ट में नेताजी की अस्थियों को लेकर दायर की गई याचिका

पिछले कुछ सालों में नेताजी के परिवार के कई सदस्यों ने, जिनमें उनके भाई, बेटी और अन्य लोग शामिल हैं - भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह जापान से नेताजी की अस्थियां वापस लाए। अब सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर कर दी गई है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Aug 13, 2026 पर 11:32 AM
80 साल बाद भी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां जापान में क्यों हैं? सुप्रीम कोर्ट में नेताजी की अस्थियों को लेकर दायर की गई याचिका
अवशेषों वाला कलश मंदिर के पुजारी रेवरेंड क्योई मोचिज़ुकी को सौंपा गया था, जिन्होंने उन्हें तब तक सुरक्षित रखने का वादा किया था जब तक कि उन्हें वापस भारत न ले जाया जा सके।

भारत 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में देश के सबसे मशहूर स्वतंत्रता सेनानियों में से एक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बोस की बेटी अनीता बी. फाफ की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें टोक्यो के रेनकोजी मंदिर से उनकी "अस्थियां" वापस लाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।

हालांकि अगस्त 1945 में नेताजी के गायब होने को लेकर कई तरह की बातें कही जाती रही हैं, लेकिन कुछ रिपोर्टों में यह संकेत दिया गया है कि उनके अवशेष जापान के टोक्यो स्थित रेनकोजी मंदिर में सुरक्षित रखे गए हैं। लेकिन, बोस की अस्थियां जापान में क्यों रखी गई हैं? आइए, हम आपको बताते हैं।

नेताजी की अस्थियां कहां हैं?

आम तौर पर यह माना जाता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत ताइवान में एक विमान दुर्घटना में हुई थी। 2017 में जारी एक RTI के जवाब में बताया गया था कि शाह नवाज कमेटी, जस्टिस जीडी खोसला कमीशन और जस्टिस मुखर्जी जांच आयोग की रिपोर्टों पर विचार करने के बाद, सरकार इस नतीजे पर पहुंची थी कि नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में हुई थी।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें