Petrol Price Hike: भारत में पेट्रोल और डीजल 3 रुपये महंगा पर पाकिस्तान, नेपाल का रेट आपने देखा क्या? देखिए ग्लोबल कंपैरिजन

Petrol Price Hike: शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जो लगभग चार साल बाद पहली बार हुआ है। इसके बावजूद, दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी सबसे कम रही है।

अपडेटेड May 15, 2026 पर 11:41 AM
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भारत में पेट्रोल और डीजल 3 रुपये महंगा पर पाकिस्तान, नेपाल का रेट आपने देखा क्या?

Petrol Price Hike: शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जो लगभग चार साल बाद पहली बार हुआ है। इसके बावजूद, दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी सबसे कम रही है। तुलनात्मक अवधि के दौरान भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल 3.2 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

ईंधन की कीमतों में यह ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब कई देशों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, सप्लाई में रुकावट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम कहीं ज्यादा तेजी से बढ़े हैं।

आंकड़ों से पता चलता है कि म्यांमार, मलेशिया, पाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में पेट्रोल की कीमतों में 40 प्रतिशत से लेकर 89 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ बाजारों में डीजल की कीमतों में 100 प्रतिशत से भी अधिक की उछाल आई है।

देश पेट्रोल कीमत में बढ़ोतरी डीजल कीमत में बढ़ोतरी
म्यांमार +89.7% +112.7%
मलेशिया +56.3% +71.2%
पाकिस्तान +54.9% +44.9%
संयुक्त अरब अमीरात +52.4% +86.1%
अमेरिका +44.5% +48.1%
फिलीपींस +40.6% +53.8%
श्रीलंका +38.2% +41.8%
नेपाल +38.2% +58.5%
दक्षिण अफ्रीका +33.1% +63.6%
कनाडा +31.9% +32.8%
न्यूजीलैंड +30.7% +88.6%
थाईलैंड +29.7% +32.4%
बेल्जियम +25.3% +30.9%
वियतनाम +23.8% +50.6%
चीन +21.7% +23.7%
फ्रांस +20.9% +31.0%
यूनाइटेड किंगडम +19.2% +34.2%
दक्षिण कोरिया +19.0% +26.2%
ऑस्ट्रेलिया +18.5% +43.1%
बांग्लादेश +16.7% +15.0%
इटली +15.4% +19.8%
जर्मनी +13.7% +19.8%
सिंगापुर +12.7% +64.7%
जापान +9.7% +11.2%
भारत +3.2% +3.4%
सऊदी अरब 0.0% 0.0%


शुक्रवार को ईंधन की कीमतों में संशोधन के बाद भी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम रही है। यह दिखाता है कि सरकार ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद लंबे समय तक खुदरा ईंधन कीमतों को लगभग स्थिर रखकर उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई को लेकर चिंता और ईरान से जुड़े पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से भारी घाटा उठाकर कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही थीं।

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